मंजिल की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती छोटी कविताओं का संग्रह

मंजिल की ओर

दोस्तों, मुझे यकीन है आपके साथ भी ऐसा कभी हुआ होगा। लोगो के साथ ऐसा अक्सर ही होता है। हम कोई लक्ष्य तय करते है फिर बड़े उत्साह के साथ मंजिल की ओर बढ़ना शुरू करते है। लेकिन कुछ ही समय बाद हमारा उत्साह ठंडा होने लगता है और हम अपने लक्ष्य से भटक जाते है।

कभी-कभी तो सामने कठिनाइयों को देख के हम मंजिल की ओर सफ़र शुरू ही नही करते है। ऐसे समय में हमें आगे बढ़ने और उत्साह बनाये रखने के लिए प्रेरणा की आवश्यकता होती है। जो हमें हमारे लक्ष्य को पाने के लिए हमें प्रेरित करे। बस इन्ही उद्देश्यों से मैंने कुछ छोटी कविताएँ यहाँ पेश किया है। और इस कविता संग्रह को मैंने नाम दिया है “मंजिल की ओर” उम्मीद है आपको ये पसंद आयेंगे।

#१ सीधे रस्ते मिल जाये मंजिल

सीधे रस्ते मिल जाये मंजिल,
ऐसा कोई फ़साना नहीं देखा।
जिसे प्यास हो मंजिल की,
उसकी जुबां पे बहाना नही देखा।
यूँ ही काट के ज़िंदगी,
तो रोज मरते है लाखो,
बदल दे परिभाषा जो जिंदगी की,
कमजोर दिलों में वो इरादा नही देखा।

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#२ मैं लक्ष्य नहीं बदलता

मैं बिस्तर भी बदलता हूँ,
नींद में करवटें भी बदलता हूँ।
मिले ना मंजिल मुझे,
तो मैं परिवेश भी बदलता हूँ।
मैं सोच भी बदलता हूँ,
मैं नजरिये भी बदलता हूँ।
मिले ना मंजिल मुझे,
तो मैं तरीके भी बदलता हूँ।
मैं रफ़्तार भी बदलता हूँ,
कभी तेज कभी आहिस्ते बदलता हूँ।
बदलता नहीं अगर मैं कुछ,
तो मैं लक्ष्य नही बदलता हूँ।
उसे पाने का पक्ष नही बदलता हूँ।

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#३ मंजिल अब दूर नही

मंजिल अब दूर नही - मंजिल की ओर

रुक गए अगर तुम, तो रह जाओगे पीछे,
दूर नहीं अब मंजिल, बस कुछ ही मोड़ और है।
ओझल ना हो मंजिल, एक पल भी नजरों से,
हर पल करती, दिल की धड़कन यही शोर है।

चाहे गरजे बादल या बिजली ही चमके,
आंधियां हो घनी या बारिश घनघोर बरसे,
हर मुश्किल पार कर, जाना उसकी ओर है।
दूर नहीं अब मंजिल, बस कुछ ही मोड़ और है।‎

चलते-चलते पैर थक जाएँ चाहे,
या पथरीले रास्तों में बाधा कोई डाले,
घने अंधियारे के बाद, आती इक भोर है।
रूक गए अगर तुम तो रह जाओगे पीछे,
दूर नही अब मंजिल, बस कुछ ही मोड़ और है।

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#४ लक्ष्य की चाहत

हाथों में हो कमाल,
तो कागज के फूल भी महकते हैं।
मन में हो शबाब,
तो गर्दिश में तारे भी चमकते हैं।
बहार में उड़ने की आशा लिए,
पतझड़ में पंछी भी चहकते है।
मन में लगी संघर्ष की चिंगारी हो,
तो जज़्बात बनके शोले भी दहकते है।

फिर तू क्यूँ डरता है
देखने से वो सपने बड़े
लक्ष्य की चाहत हो तो जनाब,
सच होकर सपने भी
अपने गले लगते है।

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#५ मंजिल मिल जायेंगे

चलते-चलते रास्ते भी मिल जायेंगे,
हँसते-हँसते सफ़र भी कट जायेंगे,
बैठे क्यों हो किसी के इंतजार में,
सफर अभी शुरू करके तो देखो
मिलते-मिलते एक दिन सारे लक्ष्य भी मिल जायेंगे।

क़दमों के ताल से पर्वत भी हिल जायेंगे
कांटो से गुजरोगे तो फूल भी खिल जायेंगे।
छिपे क्यों हो चुनौतियों के डर से,
एक बार चुनौतियों से लड़ के तो देखो,
लड़ते-लड़ते एक दिन सारे मुकाम भी मिल जाएँगे।

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मुझे उम्मीद है इन कविताओं ने आपको अपने मंजिल की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया होगा। अपना अनुभव हमारे साथ शेयर करे। हमसे फेसबुक में जुड़ सकते है। हमारे ईमेल अपडेट से जुड़ सकते है या फिर आप हमें ईमेल भी कर सकते है। धन्यवाद।

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Chandan Bais

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4 Responses

  1. Anjor LAL suryawanshi कहते हैं:

    Chaah. Nahin mere. Man me ichchha kaise jagrit karta hu, mere pyare doston tumhen har baat pe Teri taali thokta hu, mat samajhna gair mujhe tum -2, dil Se salaam karta hu .

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