जीवन पर कविता :- जीवन की शतरंज बिछी है | Jeevan Par Hindi Kavita

जीवन के रंग अनेक हैं। कभी जीवन राजा तो कभी रंक है। जीवन एक ऐसा खेल है जिसमें हर चाल में कुछ नया देखने को मिलता है। न जाने कब और कैसे जीवन एक नया मोड़ ले लेता है। जो कभी असमान में रहता है अगले ही पल वह ज़मीन की धूल फांक रहा होता है। ऐसा ही कुछ बयान करने की कोशिश की गयी है इस जीवन पर कविता में :-

जीवन पर कविता

जीवन पर कविता

जीवन की शतरंज बिछी है
इंसाँ इसके मोहरे हैं।
कोई राजा कोई रानी
कुछ चेहरे दोहरे हैं।।

ऊँट सवारी, घोड़े-हाथी
पैदल चलते प्यादे हैं।
कोई सीधा कोई ढैया
कितने बोझा लादे हैं।

ऊँचा-नीचा काला-गोरा
यही ज़िन्दगी में होता।
हार-जीत के अंकुर फूटें
वही काटता जो बोता।

राजा रानी कहने भर को
क़ुर्बानी सैनिक देते।
घोर सियासत वज़ीरे आज़म
चौपट चौंसठ घर होते।

सब होते जो एक बराबर
स्वर्ग धरा पर ही मिलता।
खुशियों की इस फुलवारी में
जीवन पुष्प सदृश खिलता ।

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अंशु विनोद गुप्ता जी अंशु विनोद गुप्ता जी एक गृहणी हैं। बचपन से इन्हें लिखने का शौक है।नृत्य, संगीत चित्रकला और लेखन सहित इन्हें अनेक कलाओं में अभिरुचि है। ये हिंदी में परास्नातक हैं। ये एक जानी-मानी वरिष्ठ कवियित्री और शायरा भी हैं। इनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें “गीत पल्लवी “, दूसरी पुस्तक “गीतपल्लवी द्वितीय भाग एक” प्रमुख हैं। जिनमें इनकी लगभग 50 रचनाएँ हैं।

इतना ही नहीं ये निःस्वार्थ भावना से साहित्य की सेवा में लगी हुयी हैं। जिसके तहत ये निःशुल्क साहित्य का ज्ञान सबको बाँट रही हैं। इन्हें भारतीय साहित्य ही नहीं अपितु जापानी साहित्य का भी भरपूर ज्ञान है। जापानी विधायें हाइकु, ताँका, चोका और सेदोका में ये पारंगत हैं।

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