इत्तेफाक-ए-शायरी – जिंदगी के इत्तेफाकों का शायरी रूपी संग्रह

इंसान की जिंदगी इत्तेफाकों से भरी पड़ी है। जन्म से लेकर मौत तक इत्तेफाक ही इत्तेफाक हैं। कई लोग इत्तेफाक से मिल जाते हैं और कई इत्तेफाक से बिछड़ जाते हैं। लेकिन ये जिंदगी यूँ ही चलती रहती है। इत्तेफाकों के सिलसिले यूँ ही चलते रहते हैं। ऐसे ही कुछ इत्तेफाकों संजोया है हमने इस शायरी संग्रह में :- ‘ इत्तेफाक-ए-शायरी ‘

इत्तेफाक-ए-शायरी

इत्तेफाक-ए-शायरी

1.
ए खुदा ये इत्तेफाक बनाये रखना
उसका और मेरा साथ बनाये रखना,
हमें डर नहीं ज़माने और वक़्त की आंधियो का
बस हमारे सर पर अपना हाथ बनाये रखना।

2.
दिल धड़क रहे थे मन ये बेताब था
उससे हमारा रिश्ता बहुत ही पाक था,
न जाने क्यों जुदा हो गया वो हमसे
न जाने किसी की साजिश थी
या ये कोई इत्तेफाक था।

पढ़िए :- शायरी खामोशियों की

3.
वक़्त मिला तो मिलना फिर से होगा तुझसे
न मिला तो मिलना इत्तेफाक से होगा।



4.
न ये संजीदगी की बात थी न ये मजाक की बात थी,
मेरी जिंदगी का बर्बाद होना महज इत्तेफाक की बात थी।

5.
उनकी नजरों से मेरी नजरों की बात हो जाए,
धड़के दिल उसका भी मेरे नाम से ऐसे हालात हो जाएँ,
तमन्ना हम भी रखते हैं उससे इश्क फरमाने की
इत्तेफाकन ही सही उससे अकेले में मुलाकात हो जाए।

6.
अकेला नहीं हूँ मैं, कई आशिक मेरे जैसे हैं,
नसीब होती है किसे ये मोहब्बत की जन्नत
ये तो महज इत्तेफाक की बात है।

7.
उसका राहों में मिल जाना महज एक इत्तेफाक ही था,
अगर वो मेरे होते तो लौट आये होते।

8.
लौट आये वो मेरी जिन्दगी में
लेकिन क्यों ?
ये अब तक भी राज था,
उसका लौट आना इत्तेफाक था
या उसका बिछड़ जाना इत्तेफाक था।

पढ़िए :- दिल का दर्द बयां करती शायरी

9.
ये इत्तेफाक ही है जो तुम हर मोड़ पर मिल जाते हो,
वर्ना दुवाएं हमारी खुदा कहाँ कबूल करता है।

10.
मेरी जिंदगी में अक्सर ऐसे इत्तेफाक होते हैं,
दर्द तभी मिलते हैं जब हम खुश होते हैं।



11.
कुछ सोच कर खुदा ने भेजा है तुझे मेरी जिंदगी में,
मुझसे तेरा यूँ मिलना इत्तेफाक नहीं हो सकता।

12.
इत्तेफाकन ही खुल गए सब राज उसके,
बस उस रोज से वो हमारे लिए बेवफा हो गया।

13.
ये इत्तेफाक था या जरूरत उसे खींच लायी थी,
बुरे वक़्त में जिसने हमें अपनी औकात दिखाई थी।

14.
इत्तेफाक ये है आज-कल सब की जिंदगी में
कि जितने भी झूठ बोले जाते हैं,
पूरी सच्चाई के साथ बोले जाते हैं।

15.
उसका आना और जाना अब मजाक सा लग रहा है,
हमारे दरमियान बीता हर पल इत्तेफाक सा लग रहा है।

पढ़िए :- औकात पर बेहतरीन शायरी संग्रह

‘ इत्तेफाक-ए-शायरी ‘ शायरी संग्रह के बारे में अपने विचार हमें जरूर बताएं। अगर आप भी रखते हैं कुछ लिखने का हुनर तो देर मत कीजिये। लिख भेजिए हमें अपनी रचना। आपकी रचना को हम अपने ब्लॉग पर प्रकाशित करने का यथासंभव प्रयास करेंगे। धन्यवाद।

ये रचनाएँ भी पढ़े..



अच्छा लगा? तो क्यों ना लाइक और शेयर करे..!

हमारे सब्सक्रिप्शन पालिसी जानिए या अपना सब्सक्रिप्शन अपडेट कीजिये।

Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

You may also like...

1 Response

  1. Gulsher Hayat कहते हैं:

    Beautifull baetifulll beautifull .👍👍👍👍👍
    My name is Gulsher hayat mujhe apki shayri 11 no.. wali bhot pasnd aae ap se gujarish mujhe ye shayri de plz plz plz

प्रातिक्रिया दे

हमें ख़ुशी है की हमारे लेख के बारे में आप अपने विचार देना चाहते है, परन्तु ध्यान रहे हम सारे कमेंट को हमारे कमेंट पालिसी के आधार पर स्वीकार करते है।