होली पर बीती यादों की कविता :- वो फाल्गुन की मस्ती वो होली के रंग

होली का त्यौहार सिर्फ रंगों का ही त्यौहार ही नहीं, ये त्यौहार है अपनेपन का। त्यौहार उमंगों का, कुछ अनकही बातों का और कुछ बीती हुयी यादों का। होली के रंगों और होली की मस्ती में जब किसी की यादें हमारे दिल में हिलोरें मारती हैं तो क्या आलम होता है आइये पढ़ते हैं होली पर बीती यादों की कविता में :-

होली पर बीती यादों की कविता

होली पर बीती यादों की कविता

याद आते हैं बिताये थे, पल जो तेरे संग
वो फाल्गुन की मस्ती वो होली के रंग।

साथ तेरा सारे जहाँ से प्यारा था
एक तू ही तो मेरे जीने का सहारा था
मैं था बीच समंदर एक डूबती हुयी कश्ती
जिसका बस तू ही एक किनारा था,
जब से बिछड़ा हूँ तुमसे, रहती है
मेरी मेरे ही जज्बातों से जंग,
याद आते हैं बिताये थे, पल जो तेरे संग
वो फाल्गुन की मस्ती वो होली के रंग।

होली के रंगों में ही
हुयी हमारी पहली मुलाकात थी,
मुझे तुझसे मिलाने में शायद
शामिल सारी कायनात थी,
रुक गया था सारा समा
खामोश हो गयी थी हर हुडदंग
याद आते हैं बिताये थे, पल जो तेरे संग
वो फाल्गुन की मस्ती वो होली के रंग।

फिर तो तेरी गली में अक्सर मेरा
आना जाना हो गया
ये दिल भी मेरा तेरे हुस्न का
दीवाना हो गया,
बिना तेरे दीदार के फिर
ये रहने लगा है तंग
याद आते हैं बिताये थे, पल जो तेरे संग
वो फाल्गुन की मस्ती वो होली के रंग।

पढ़िए :- होली के बारे में अप्रतिम विचार।

पहले साल की होली में
मुझको तुझसे प्यार हुआ
अगली होली में जाकर
उस प्यार का फिर इजहार हुआ,
भूल गया था फिर तो मैं
अपने जीने का ढंग
याद आते हैं बिताये थे, पल जो तेरे संग
वो फाल्गुन की मस्ती वो होली के रंग।

बातें उसके संग होने लगी
दिल में कई उम्मीदें जगीं
पर न जाने मेरे प्यार को क्यों
कैसे किसकी नजर लगी,
कट गयी डोर प्यार की बन गया
मैं तो कटी पतंग
याद आते हैं बिताये थे, पल जो तेरे संग
वो फाल्गुन की मस्ती वो होली के रंग।

झट साल बीतते चले गए
कभी तू था मेरे पास
तू ही तो मेरा अपना था
एक तू ही था मेरा विश्वास,
तेरे दूर यूँ जाने से मेरी
सब खुशियाँ हुयीं बेरंग
याद आते हैं बिताये थे, पल जो तेरे संग
वो फाल्गुन की मस्ती वो होली के रंग।

पढ़िए कविता :- होली आयी उड़े गुलाल।

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धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

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