देश पर कविता :- उठो जागो अब आंखें खोलो | Desh Par Kavita

देश की हालत से कौन अनजान है? हर कोई जनता है कि जहाँ एक ओर देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर देश में ऐसे भी लोग हैं जो भूख से मर रहे हैं। जिनके पास रहने को छत नहीं और पहनने को कपड़े नहीं हैं। ऐसे में देश को जरूरत है उन लोगों को साथ लेकर चलने की और देश की हालत सुधारने की। इसी ज़ज्बे के लिए प्रेरित कर रही है यह देश पर कविता  “उठो जागो अब आंखें खोलो” :-

देश पर कविता

देश पर कविता

उठो ,जागो ,
अब आंखें खोलो !
हक अधिकार के लिए
तुम भी बोलो !!

जाति धर्म से ऊपर उठकर,
तुम भी कुछ सोचो, प्यारे !
महंगाई अन्याय भ्रष्टाचार के,
बढ़ते कदम को रोको ,प्यारे !!

देखो, जलते भारत मां को,
किस तरह रुदन कर रही !
उनके ही पुत्री को देखो,
आपस में कैसे लड़ रही !!

रो रहे किसान यहां के,
जवान बेमौत मर रहा !
गरीब मर रहे अन्न के बिना,
लाखों टन दाना सड़ रहा !

लूट रही स्त्री चौराहे पर,
नेताजी कुछ नहीं कर रहा!
शिक्षित बन गया बेरोजगार अब,
रैली कर-कर के मर रहा !!

पढ़िए :- देशभक्ति कविता “देश हमें देता है सब कुछ”


देश पर कवितायह कविता हमें भेजी है एसपी राज जी ने बेगुसराय से।

‘ माँ की ममता पर कविता ’ के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ blogapratim@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

धन्यवाद।

हमारे सब्सक्रिप्शन पालिसी जानिए या अपना सब्सक्रिप्शन अपडेट कीजिये।

3 Comments

  1. Avatar Praveen Kumar
  2. Avatar Md Barkat
  3. Avatar S. P. Raj

Add Comment