बादल पर कविता :- नभ में काले बादल छाए | Badal Par Kavita

कविता में बादलों का महत्त्व प्रतिपादित किया गया है। बादलों से बरसाया गया जल ही वर्षा कहलाता है जो धरती पर पीने योग्य पानी का प्रमुख स्रोत है। ग्रीष्म ऋतु में जब गर्मी से लोग बेहाल हो जाते हैं तो बादलों द्वारा बरसाई गई शीतल जल की बूँदें ही उन्हें भीषण आतप से राहत देती हैं। प्रकृति के सभी घटक आपस में जुड़े हुए हैं। बादलों से जल होता है। जल से वनस्पति उत्पन्न होती है और वनस्पतियों से प्राणियों का जीवन संचालित होता है। धरती पर बादलों के बिना जीवों का अस्तित्व असंभव है। बादल सचमुच हमारे जीवनदाता हैं। आइये पढ़ते हैं बादल पर कविता :-

बादल पर कविता

बादल पर कविता

नभ में काले बादल छाए
इन्हें देखकर सब हर्षाए,
राहत की साँसें ली उनने
जो गर्मी से गए सताए।

पानी की थी मारामारी
प्यास बुझाना भी था भारी,
कितने जीवों ने पानी बिन
अपनी जीवन – पारी हारी।

बड़े जोर से चलती थी लू
अंगारे – सी तपती थी भू,
कहीं चैन का नाम नहीं था
सदा पसीना रहता था चू।

धरती दरकी नदिया सूखी
हँसी वनों की भी थी रूखी,
गाय हुई हड्डी का ठट्ठर
हाँफ रही थी चिड़िया भूखी।

ऐसे में बादल का आना
लगता कितना सुखद सुहाना,
यह तो है तपते थारों में
जैसे छाया का पा जाना।

बूँदें बरसी बनकर मोती
जन – जीवन में खुशियाँ बोती,
ये लाती जग में हरियाली
फसल खेत में इनसे होती।

सचमुच जीवन – दाता बादल
इनसे बहता नदियों में जल,
अगर नहीं आएँ बादल तो
मुश्किल है कटना कल के पल।

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