अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस :- भारत की साक्षरता और विश्व की साक्षरता से जुड़ी जानकारी

बचपन से हम सबको यही पढ़ाया जाता है कि सारी जिंदगी पढ़ाई ही हमारे काम आएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया में कितने लोग पढ़े लिखे हैं? क्या आप ये जानते हैं कि भारत स्वतंत्रता प्राप्ति के समय कितना साक्षर था। आखिर कब से मनाया जाने लगा साक्षरता दिवस? आइये जानते हैं इन सब सवालों के जवाब अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस लेख में

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

साक्षरता दिवस कब मनाया जाता है

26 अक्टूबर 1966 को यूनेस्को ( UNESCO ) ने अपनी 14वीं बैठक में 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया। 8 सितम्बर 1967 को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया। इस दिवस का मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को साक्षरता के प्रति जागरूक करना था। यूनेस्को द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व की साक्षरता दर 86 प्रतिशत है।

साक्षरता

साक्षरता का अर्थ है पढ़ा लिखा होना। यहाँ पर पढ़े लिखे होने का अर्थ है यदि कोई व्यक्ति अपना नाम लिख और पढ़ लेता है तो वो साक्षर माना जाता है। वैसे ये नियम भारत में हैं। अलग-अलग देशों में साक्षरता को मापने के अलग-अलग मापदंड हैं। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग साक्षर बन सकें। रोचक बात यह है कि अगर कोई विदेशी किसी और देश में रहता है और वहां की भाषा लिख-बोल नहीं पता तो उसे भी अनपढ़ ही माना जाता है।

साक्षरता की शुरुआत 8,000 ई.पू. पहले हुयी थी। परन्तु उस समय मात्र गणना के लिए कुछ यन्त्र बनाये गए थे। तकरीबन 3000-3500 ई.पू. लिखने पढने की शुरुआत हुयी। इसके प्रमाण मेसोपोटामिया, इजिप्ट, मेसोअमेरिका, चीन और सिन्धु सभ्यता में मिलते हैं।

यूनेस्को द्वारा दिए जाने वाले साक्षरता पुरस्कार

यूनेस्को द्वारा साक्षरता के लिए दो पुरस्कार दिए जाते हैं।

पहला है किंग सेजोंग लिट्रेसी सम्मान है। जिसे 1989 में कोरिया की सरकार की सहायता से स्थापित किया गया था। इस पुरस्कार की संख्या 2 है। इस पुरस्कार का उद्देश्य मातृभाषा में शिक्षा को आगे बढ़ाना है।

दूसरा पुरस्कार है कन्फ्यूशियस पुरस्कार, यह पुरस्कार चीन सरकार की सहायता से 2005 में स्थापित किया। इस पुरस्कार का मुख्या उद्देश्य है पिछड़े इलाकों में रहने वाले निवासी और युवाओं को साक्षर करना है। इस पुरस्कार की संख्या तीन है।

ये पाँचों पुरस्कार जीतने वाले हर एक व्यक्ति को एक मैडल, एक डिप्लोमा और $20,000 दिए जाते हैं।

साक्षरता दर

एक देश की सारी जनसँख्या में से पढ़े लिखे लोगों की गिनती की जाती है। उसके बाद दोनों का अनुपात निकाला जाता है। व्यस्क लोगों की साक्षरता दर देखने के लिए 15 वर्ष से ऊपर के लोगों की गणना की जाती है। युवा लोगों की साक्षरता दर के लिए उम्र 15-24 साल निर्धारित है। इसको जानने का गणित में एक सूत्र है।

साक्षरता दर प्रतिशत = शिक्षित जनसंख्या/कुल जनसंख्या * 100

भारत में साक्षरता

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय सन 1947 में भारत की साक्षरता दर 12 प्रतिशत थी। 2011 की गणना के अनुसार साक्षरता दर बढ़ कर 74 प्रतिशत हो चुकी है। इनमे पुरुषों की साक्षरता दर 82.1 प्रतिशत है और औरतों की साक्षरता दर 65.5 प्रतिशत है। यह साक्षरता दर 7 वर्ष के ऊपर वालों की है। भारत में 6 वर्ष की आयु से कम आयु वाले बच्चों को शिक्षित नहीं माना जाता चाहे वो स्कूल जाता हो और उसे पढना भी आता हो। विश्व में भारत साक्षरता दर के हिसाब से 168 वें स्थान पर है।

भारत में सबसे ज्यादा साक्षरता दर वाला राज्य केरला है। जिसकी साक्षरता दर 2011 की गणना के अनुसार 93.9 है। वहीं सबसे कम साक्षरता दर बिहार का 63.8 प्रतिशत है। बिहार ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत तेजी से विकास कर रहा है इसके लिए बिहार के व्यस्क शिक्षा विभाग को यूनेस्को की तरफ से 1981 में यूनस्को अवार्ड दिया जा चुका है। भारत में भी साक्षरता दिवस अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस वाले दिन ही मनाया जाता हैै।

भारत में शिक्षा

भारत में शिक्षा के स्तर को बढाने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं। भारत में सबसे पहले स्वर्गीय गोपाल कृष्ण गोखले जी ने 18 मार्च 1910 में ही भारत में “मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा” के प्रावधान के लिए ब्रिटिश विधान परिषद् के समक्ष प्रस्ताव रखा था, जो निहित स्वार्थों के विरोध के चलते अंततः ख़ारिज हो गया।

इसके लिए भारतीय सरकार ने संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 में अनुच्‍छेद 21-क शामिल किया। जिस पर सर्व शिक्षा अभियान नाम के तहत काम किया जा रहा है। जिसके अनुसार शिक्षा हर 6 से 14 वर्ष की आयु वाले बच्चे के लिए मुफ्त और अनिवार्य कर दी गयी। पर यहाँ एक परेशानी सामने ये आयी कि ऐसे बच्चों के साथ स्चूलों में सही व्यवहार नहीं किया जाता था। जिसके बाद नि:शुल्‍क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आरटीई) अधिनियम, 2009 लागू किया गया। जिसके अनुसार हर 6 से 14 वर्ष की आयु वाले बच्चे को औपचारिक स्‍कूल, जो कतिपय अनिवार्य मानदण्‍डों और मानकों को पूरा करता है, में संतोषजनक और एकसमान गुणवत्‍ता वाली पूर्णकालिक प्रांरभिक शिक्षा का अधिकार है।

साक्षरता से जुड़े कुछ और रोचक तथ्य

  • यूनस्को की एक रिपोर्ट के अनुसार सबसे कम क्षेत्रीय वयस्क साक्षरता दर दक्षिणी एशिया की 51% है और यही क्षेत्र शिक्षा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगर बात की जाए देश की तो सबसे कम साक्षरता वाला देश नाइजर है। जिसकी साक्षरता दर 15.5% है। पूरी दुनिया में अभी भी 75,00,00,000 व्यस्क लोग साक्षर नहीं हैं।

 

  • क्या आप जानते हैं कि 100 प्रतिशत साक्षरता दर वाला देश कौन सा है? मुझे उम्मीद है कि आपने इस देश का नाम भी नहीं सुना होगा। विश्व में 100 प्रतिशत साक्षरता दर वाला देश अंडोरा ( Andorra ) है। यह यूरोप का एक छोटा सा देश है जो उत्तर में फ्रांस और दक्षिण में स्पेन की सरहद से घिरा हुआ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहाँ 6 से 16 साल की उम्र के बच्चों की स्कूल में उपस्थिति अनिवार्य है। सिर्फ अंडोरा ही नहीं इस सूची में फ़िनलैंड, वैटिकन सिटी और नॉर्वे जैसे देश भी शामिल हैं।

 

  • यूनेस्को की ही एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य एशिया की साक्षरता दर 100 प्रतिशत है।
  • सन 1820 तक मात्र दुनिया के मात्र 12 प्रतिशत लोग ही साक्षर थे। आज के समय ये आंकड़े पलट चुके हैं और अब मात्र 17 प्रतिशत लोग ही हैं जो पढ़े लिखे नहीं हैं।

 

तो ये थी अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की । इसके अलावा यदि आप साक्षरता से जुड़ी कोई अन्य जानकारी चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स के जरिये हमें अवश्य बताएं।

धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

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