स्वामी विवेकानंद के विचार :- स्वामी विवेकानंद के 30 अनमोल सुविचार

12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में जन्में स्वामी विवेकानंद जी ने अध्यात्म के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया है। विदेशों में सनातन धर्म और भारत की अध्यात्मिक शिक्षा की जानकारी स्वामी विवेकानंद के जरिये ही सबको हुयी। पहले उनका नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से मिलने के बाद उनका नाम स्वामी विवेकानंद हो गया। आइये आज पढ़ते हैं हम उन्हीं महान व्यक्तित्व के कुछ अनमोल विचार ‘ स्वामी विवेकानंद के विचार ‘ में :-

स्वामी विवेकानंद के विचार

स्वामी विवेकानंद के विचार

1. अगर हम भगवान को अपने दिल में और हर जीव में नहीं देख सकते हैं तो हम भगवान को खोजने के लिए कहां जा सकते हैं?

2. यह भगवान से प्रेम का बंधन वास्तव में ऐसा है जो आत्मा को बांधता नहीं है बल्कि प्रभावी ढंग से उसके सारे बंधन तोड़ देता है।

3. अपने जीवन को सभी के लिए और सभी की खुशी के लिए समर्पित करना ही धर्म है। धर्म वह नहीं जो आप अपने लिए करते हैं।

4. जो तप और अन्य कठिन योग अन्य युगों में प्रचलित थे अब काम नहीं करते हैं। इस युग में जरूरत है दूसरों की मदद करने की।

5 जब लोग तुम्हे गाली दें तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो। सोचो, तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे हैं।

6. किसी का या किसी चीज के लिए भी इंतजार मत करो। आप जो भी कर सकते हैं करिए, किसी और के भरोसे कोई उम्मीद न बनाएं।


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7. मस्तिष्क को उच्च विचारों, उच्चतम आदर्शों से भरें, उन्हें आपके सामने दिन और रात रखें, और उनमें से बहुत अच्छा काम आएगा।

8. जब एक विचार विशेष रूप से दिमाग पर कब्जा करता है, तो यह वास्तविक शारीरिक या मानसिक स्थिति में परिवर्तित हो जाता है।

9. अगर मैं अपने अनंत दोषों के बावजूद खुद से प्यार करता हूं, तो मैं कुछ दोषों की झलक से ही किसी से नफरत कैसे कर सकता हूँ।

10. स्वतंत्र होने का साहस करो। जहाँ तक तुम्हारे विचार जाते हैं वहां तक जाने का साहस करो , और उन्हें अपने जीवन में उतारने का साहस करो।

11. जो आपकी मदद कर रहा है उसे मत भूलना। जो आपसे प्यार कर रहा है, उसे नफरत मत करना। जो आप पर विश्वास कर रहा है, उसे धोखा मत देना।

12. सच्ची सफलता और आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है। वह पुरुष या स्त्री जो बदले में कुछ नहीं मांगता, पूर्ण रूप से निस्स्वार्थ व्यक्ति, सबसे सफल है।

13. ब्रह्मांड में सभी शक्तियां पहले से ही हमारे पास हैं। यह हम ही हैं जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपना हाथ रखा है और रोते है कि हर तरफ अंधेरा है।

14. हम वही हैं जो हमारे विचारों ने हमें बनाया है; तो आप जो सोचते हैं उसके बारे में परवाह करें। शब्द सहायक हैं। विचार जिंदा रहते हैं; वे दूर तक यात्रा करते हैं।

15. महान कार्य के लिए लंबे समय तक महान और लगातार प्रयास की आवश्यकता होती है। चरित्र को हजारों ठोकरों के बाद ही स्थापित किया जाना चाहिए।



16. जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे। यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो , तुम कमजोर हो जाओगे। अगर खुद को ताकतवर सोचते हो , तुम ताकतवर हो जाओगे।

17. जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है।

18. श्री रामकृष्ण कहा करते थे ,”जब तक मैं जीवित हूँ , तब तक मैं सीखता हूँ।” वह व्यक्ति या वह समाज जिसके पास सीखने को कुछ नहीं है वह पहले से ही मौत के जबड़े में है।

19. अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।

20. यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।

21. कभी नहीं सोचना कि आत्मा के लिए कुछ भी असंभव है। ऐसा सोचना भी सबसे बड़ा पाखंड है। यदि पाप है, तो यह एकमात्र पाप यह कहना है कि आप कमज़ोर हैं, या दूसरे कमज़ोर हैं।

22. हमारा कर्तव्य है कि हम हर किसी को उसका उच्चतम आदर्श जीवन जीने के संघर्ष में प्रोत्साहन करें और साथ ही साथ उस आदर्श को सत्य के जितना निकट हो सके लाने का प्रयास करें।

23. उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो , तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो।

24. किसी की निंदा ना करें। अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।

25. अस्तित्व का पूरा रहस्य है कोई भी डर न होना। कभी डरिये मत कि आपका क्या बनेगा, किसी पर भी निर्भर न रहिये। जिस पल आप सभी प्रकार की सहयता को अस्वीकार कर देंगे, आप स्वतंत्र हो जायेंगे।


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26. आपको अपने अंदर से बढ़ना होगा। कोई भी आपको सिखा नहीं सकता है, कोई भी आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता है। आपको सब सिखाने वाला कोई अन्य शिक्षक नहीं बल्कि आपकी अपनी आत्मा है।

27. वेदांत कोई पाप नहीं पहचानता है, यह केवल त्रुटि को पहचानता है। और वेदांत के अनुसार सबसे बड़ी गलती यह कहना है कि आप कमज़ोर हैं, कि आप एक पापी हैं, एक दुखी प्राणी हैं, और आपके पास कोई शक्ति नहीं है और आप यह नहीं कर सकते हैं।

28. हम जो बोते हैं वो काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं। हवा बह रही है, वो जहाज जिनके पाल खुले हैं इससे टकराते हैं, और अपनी दिशा में आगे बढ़ते हैं, पर जिनके पाल बंधे हैं हवा को नहीं पकड़ पाते। क्या यह हवा की गलती है ?…..हम खुद अपना भाग्य बनाते हैं।

29. एक विचार लो। उस विचार को अपना जीवन बना लो। उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका है।

30. जिस क्षण मैंने यह जान लिया कि भगवान हर एक मानव शरीर रुपी मंदिर में विराजमान हैं, जिस क्षण मैं हर व्यक्ति के सामने श्रद्धा से खड़ा हो गया और उसके भीतर भगवान को देखने लगा। उसी क्षण मैं बन्धनों से मुक्त हूँ, हर वो चीज जो बांधती है नष्ट हो गयी, और मैं स्वतंत्र हूँ।

आशा करते हैं ‘ स्वामी विवेकानंद के विचार ‘ पढ़ कर आपको जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा जरूर मिली होगी। ‘ स्वामी विवेकानंद के विचार ‘ के बारे में अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

धन्यवाद। तबतक पढ़िए महापुरुषों के ये अनमोल कथन:

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Chandan Bais

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