पढ़ना लिखना छोड़ के हमने :- परीक्षा की तैयारी पर हास्य कविता

परीक्षा के समय विद्यार्थी पास होने के लिए कई तरह के ढंग अपनाते हैं। कुछ दिन-रात किताबों में ही घुसे रहते हैं। कुछ दोस्तों से पढ़ने के लिए सहायता मांगते रहते हैं और कुछ ट्यूशन जाना शुरू कर देते हैं। एक और तरह के प्राणी भी होते हैं जो तैयारी तो परीक्षा की करते हैं लेकिन पढना लिखना छोड़ कर बाकी सब अजमाते हैं। ऐसे ही विद्यार्थियों की कथा बयां करती हास्य कविता हम आपके लिये लाये हैं पढ़ना लिखना छोड़ के हमने  :-

पढ़ना लिखना छोड़ के हमने

पढ़ना लिखना छोड़

जबसे हमारी परीक्षा का
समय निकट में आया है
पढना-लिखना छोड़ के हमने
बाकी सब अजमाया है।

लगा रहे हैं तरकीब कि
परीक्षक से कोई पहचान निकल जाए
परीक्षा में आने वाले अंक
फिर शायद ही कुछ संभल जाएँ,
इसी चक्कर में हमने शाम को
मंत्री जी को खाने पर बुलाया है
पढ़ना-लिखना छोड़ के हमने
बाकी सब अजमाया है।

मंदिर भी हो आये हम और
मस्जिद भी होकर आये हैं
आशीर्वाद भी सबका
हम थोक में लेकर आये हैं
लगा लिया है तिलक हमने
ताबीज भी बंधवाया है
पढना-लिखना छोड़ के हमने
बाकी सब अजमाया है।

वास्तुशास्त्र के हिसाब से
तुड़वाई हैं हमने दीवारें
तंग होते है पडोसी अपने
और हम बैठे chill मारें,
ठीक बीच कमरे में हमने
लाफिंग बुद्धा भी रखवाया है
पढ़ना-लिखना छोड़ के हमने
बाकी सब अजमाया है।

परीक्षा ही नहीं ये मेरी
घर की इज्ज़त का सवाल है
इसी वजह से मचा हुआ
इतना बड़ा बवाल है,
मेरे पास होने का पिता जी ने
पूरा जुगाड़ लगाया है
पढ़ना-लिखना छोड के हमने
बाकी सब अजमाया है।

जबसे हमारी परीक्षा का
समय निकट में आया है
पढ़ना-लिखना छोड़ के हमने
बाकी सब अजमाया है।

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उम्मीद है यह कविता आपको जरूर पसंद आयी होगी। इस कविता के बारे में अपने अमूल्य विचार हम तक जरूर पहुंचाएं।

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धन्यवाद।

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