नव वर्ष पर कविता :- नए वर्ष की भीनी खुशबू | नए साल पर कविता

नव वर्ष पर सभी एक दूसरे को शुभकामना देते रहते हैं और उनकी सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। ऐसी ही एक शुभकामना आदरणीय सुरेश चन्द्र “सर्वहारा” जी अपनी कविता द्वारा सबको दे रहे हैं। आइये पढ़ते हैं नव वर्ष पर कविता :-

नव वर्ष पर कविता

नव वर्ष पर कविता

हरी भरी हो अपनी धरती
बहे हवा हर दुःख को हरती,
दिन में रवि किरणें सुखकर हों
रहे चाँदनी निशि में झरती।
सदा चमन में खुशियों की ही
चिड़िया रहे चहकती,
नए वर्ष की भीनी खुशबू
हर पल रहे महकती।

रहें सभी आपस में मिलकर
सद्भावों के फूटें निर्झर,
खुशहाली की गंगा आए
दीन दुःखी पीड़ित जन के घर।
मानव – मन में बन्धु भाव की
फसलें रहें लहकती,
नए वर्ष की भीनी खुशबू
हर पल रहे महकती।

घना तिमिर चाहे हो मग में
शूल चुभें कितने ही पग में,
लक्ष्य प्राप्ति की लेकिन आशा
पलती रहे हमारे दृग में।
तूफानों में संघर्षों की
ज्वाला रहे दहकती,
नए वर्ष की भीनी खुशबू
हर पल रहे महकती।

नहीं किसी से वैर भाव हो
घृणा युद्ध के नहीं घाव हो,
शांति सौख्य विश्वास प्रेम का
जग में नित बढ़ता प्रभाव हो।
भौतिकता में सुप्त मनुजता
अब ना रहे बहकती।
नए वर्ष की भीनी खुशबू
हर पल रहे महकती।

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सुरेश चन्द्र 'सर्वहारा' कोटा, राजस्थान के रहने वाले सुरेश चन्द्र “सर्वहारा” जी स्वैच्छिक सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी (रेलवे) हैं। सुरेश जी एक वरिष्ठ कवि और लेखक हैं। ये संस्कृत और हिंदी में परास्नातक हैं। इनकी कई काव्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें नागफनी, मन फिर हुआ उदास, मिट्टी से कटे लोग आदि प्रमुख हैं।

इन्होंने बच्चों के लिए भी साहित्य में बहुत योगदान दिया है और बाल गीत सुधा, बाल गीत सुमन, बच्चों का महके बचपन आदि पुस्तकें भी लिखी हैं।

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