जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध :- जनसंख्या वृद्धि की परिभाषा और कारण

भारत की जनसंख्या बहुत ही तेजी से बढ़ती जा रही है। सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की आबादी धीरे-धीरे नहीं बल्कि एकदम ही बढ़ गयी। क्या थे जनसंख्या वृद्धि के कारण और क्या हो रही हैं जनसंख्या वृद्धि से समस्या ? इन सब सवालों के यूँ तो बहुत से जवाब हो सकते हैं लेकिन हम आपको बताएँगे उन कारणों के बारे में जो तथ्य पर आधारित हैं। तो आइये जानते हैं इस जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध में :-

जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध

जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध

इससे पहले की हम जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर बात करें आइये पहले जान लेते हैं की जनसंख्या वृद्धि क्या है ?

जनसंख्या वृद्धि क्या है

किसी भी क्षेत्र में बढ़ने वाली आबादी को जनसंख्या वृद्धि कहा जाता है। हर देश की अपनी जनसंख्या वृद्धि दर होती है। विश्व में मानव जनसंख्या वृद्धि की मात्रा लगभग 83 मिलियन सालाना या 1.1% प्रति वर्ष है। इसका अर्थ है की हर साल धरती पर 8 करोड़ 30 लाख लोग बढ़ जाते हैं जो कि धरती की कुल मानव आबादी का 1.1 प्रतिशत है।

पूरे ब्रह्माण्ड में अब तक ज्ञात ग्रहों में से सिर्फ पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव हुआ है। अरबों साल पहले पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हुई थी और करीब 200000 साल पहले मनुष्यों की। 10000 ई. पू. में पहली बार मनुष्यों ने खेती करना शुरू किया था और उस समय पूरी पृथ्वी पर मनुष्यों की संख्या 10 मिलियन अर्थात 1 करोड़ आंकी गई है। उस समय से लेकर सन 1800 तक मनुष्यों की जनसंख्या में वृद्धि बहुत धीमे गति से हुई।

मनुष्यों को 1 अरब होने में 200000 साल लगे थे और 1 अरब से 7 अरब होने में सिर्फ 200 साल और अगले 100 साल में वो 7 अरब से 11 अरब हो जाएँगे। सन 1800 में मनुष्यों की संख्या करीब 1 बिलियन अर्थात 1 अरब थी। मनुष्यों को 1 अरब से 2 अरब होने में 123 साल लगे। अगले 50 साल में वे दोगुने होकर 2 अरब से 4 अरब हो गये, और अगले 50 साल में फिर से दोगुने होकर 4 से 8 अरब होने वाले हैं। और इस सदी (2100) के अंत तक 11 अरब होने वाले हैं।

अभी दुनिया की जनसंख्या 7.7 अरब से ज्यादा है। जिसमें अकेले भारत में 135 करोड़ से ज्यादा लोग रहते है। जनसंख्या के मामले में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। और जिस गति से ये बढ़ रहा है कुछ सालों में हम चीन को पीछे छोड़ के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला पहला देश बन जायेंगे।

 वर्ल्डोमीटर के इस लिंक  पर जाकर आप ये देख सकते है कि हर सेकंड मनुष्यों की संख्या कितनी बढ़ रही है।

जनसंख्या वृद्धि के कारण

अपने प्रजाति को बनाये रखने के लिए वंशवृद्धि करना हर जीवित प्राणी का मूलभूत स्वाभाव होता है। लेकिन अगर हम जनसंख्या वृद्धि का ग्राफ देखें तो सन 1800 के बाद मनुष्यों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से बढ़ी है। इतनी तेजी से आखिर मनुष्यों की संख्या कैसे बढ़ सकती है? या तो किसी और गृह से मनुष्य यहाँ आ रहे है, या फिर पहले की तुलना में अब काफी ज्यादा बच्चे पैदा किये जा रहे है?

अगर आकड़ो को देखे तो 10000 ई.पू. से सन 1800 तक प्रति महिला औसत बच्चे जन्म देने की संख्या 6 थी, सन 1963 में 5 और अभी वर्तमान में 2.5 प्रति महिला औसत बच्चे जन्मदर दरअसल समय के साथ कम हुआ है। फिर तेज जनसंख्या वृद्धि के क्या कारन हो सकते है?

इसका कारन है मृत्युदर में कमी। 1800 से पहले जब एक महिला के 6 बच्चे होते थे उनमे से 4 बच्चे जीवित नहीं रह पाते थे, बच्चों के अलावा वयस्क मृत्युदर भी उस समय बहुत ज्यादा थी, बीमारी, प्राकृतिक आपदा, शिकारी और ऐसे दूसरे कारणों से मृत्युदर – जन्मदर से थोड़ी ही कम थी इसलिए जनसंख्या में वृद्धि मामूली थी।

सन 1800 दुनिया में औद्योगिक क्रांति का युग था, इस समय स्वास्थ्य से लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में बहुत सारे अविष्कार हुए, जिससे लोगों को प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा, बीमारियों का इलाज, बेहतर खाना आदि मिला जिससे मृत्युदर में बेतहाशा कमी आई। सन 1963 के समय में प्रति महिला औसत जन्मदर 5 था जिसमें से अब 4 बच्चे जीवित रहने लगे। अभी वर्तमान में 2.5 में से 2.5 जीवित रहते है।

जनसंख्या वृद्धि से समस्या

पृथ्वी में जीवन को सुचारू रूप से बनाये रखने के लिए प्रकृति अलग-अलग व्यवस्था करती है, इसमें हर जीवो की संख्या में सामंजस्य बनाये रखना भी प्रकृति की एक व्यवस्था है। लेकिन मनुष्य ने अपनी बुद्धि का ऐसे इस्तेमाल किया की प्रकृति की इस व्यवस्था से खुद को बाहर कर लिया, और अभी जरुरत से ज्यादा बढ़ती जनसंख्या एक समस्या बनती जा रही है।

14वीं सदी के प्रारंभ में, यूरोप में जनसंख्या वृद्धि की दर चरम पर थी, उस समय ऐसा अकाल पड़ा यूरोप में की उस अकाल ने यूरोप की जनसंख्या को लगभग आधा कर दिया।  सन 1789 में एक ब्रिटिश स्कॉलर थॉमस माल्थस ने ये अनुमान लगाया की बढ़ती जनसंख्या के कारन 19वीं सदी के मध्य में दुनिया में लोगों के पास खाने को कुछ नहीं बचेगा और 14वीं शताब्दी की तरह ही 1970 से 1980 में फिरसे अकाल आएगा। लेकिन 1950 के बाद दुनिया में जो हरित क्रांति आयी और उसने दुनिया भर में फसलों की पैदावार को 250 % तक बढ़ा दिया। इससे अकाल की समस्या तो टल गयी, लेकिन दूसरे क्षेत्रों में समस्या उत्पन्न होने लगा है।

ज्यादा लोगों के होने से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी बढ़ा है, जंगलो की कटाई, खदाने, दूसरों जीवों का विलुप्त होना, उद्योगों से नदी, समुद्रों और वायुमंडल में प्रदूषण, मनुष्यों के द्वारा उत्पन्न कचरा,  महंगाई, बेरोजगारी जैसे समस्याएँ है जो बढ़ती जा रही है। और इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की बढ़ती जनसंख्या भविष्य में अकाल जैसी भयावह स्थिति को पैदा कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो उसे नियंत्रित करना मनुष्यों के बस में नही होगा। और प्रकृति को एक बार फिरसे वही करना होगा जो उसने डायनासोर के साथ किया था।

” जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध ” आपको कैसा लगा? अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

धन्यवाद।

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