बसंत गीत कविता :- लो बसन्त के मदिर पवन से | Poem On Basant Panchami

 इस ” बसंत गीत कविता ” में ठिठुराती शीत ऋतु की समाप्ति के बाद बसन्त के आगमन का चित्रण है। बसन्त के आने पर चारों ओर हरियाली छा जाती है। खेतों में पीली सरसों लहलहाने लगती है। आम के बौराये पेड़ों पर कोयल कूकने लगती है। जंगल में टेसू के लाल लाल फूल खिलने लगते हैं । शीतल हवा तन मन में ताजगी भर देती है। बसन्त ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। सचमुच में ऋतुराज बसन्त जीवन में नव ऊर्जा का संचार कर देता है।

बसंत गीत कविता

बसंत गीत कविता

लो बसन्त के
मदिर पवन से
जीवन बहका।

सूनी थी सब
मन की शाखें,
हरियाली को
तरसी आँखें,
उजड़ा उपवन
अब टेसू से
जैसे दहका ।
लो बसन्त के
मदिर पवन से
जीवन बहका।

वीराना -सा
था जग सारा,
ठिठुरन से हो
जैसे हारा,
झूम उठे अब
लता पुष्प तरु
तो मन लहका ।
लो बसन्त के
मदिर पवन से
जीवन बहका।

भूले थे सब
सैर -सपाटा,
पसरा बाहर
था सन्नाटा,
अब कोयल की
कूकों से है
आँगन चहका।
लो बसन्त के
मदिर पवन से
जीवन बहका।

काँप रहा था
भय से मौसम ,
धुन्ध फैलती
हुई किरण नम,
अब बसन्त में
सरसों फूली
चन्दन महका।
लो बसन्त के
मदिर पवन से
जीवन बहका।

– सुरेश चन्द्र ” सर्वहारा “

( Poem On Basant Panchami In Hindi ) “ बसंत गीत कविता ” आपको कैसी लगी ? अपने विचार कमेंट बॉक्स के जरिये हम तक अवश्य पहुंचाएं। ऐसी ही कविताएँ पढ़ने के लिए बने रहिये अप्रतिम ब्लॉग के साथ।

पढ़िए बसंत पंचमी पर यह बेहतरीन रचनाएं :-


धन्यवाद।




सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"
सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"
कोटा, राजस्थान के रहने वाले सुरेश चन्द्र "सर्वहारा" जी स्वैच्छिक सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी (रेलवे) हैं। सुरेश जी एक वरिष्ठ कवि और लेखक हैं। ये संस्कृत और हिंदी में परास्नातक हैं। इनकी कई काव्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें नागफनी, मन फिर हुआ उदास, मिट्टी से कटे लोग आदि प्रमुख हैं। इन्होंने बच्चों के लिए भी साहित्य में बहुत योगदान दिया है और बाल गीत सुधा, बाल गीत सुमन, बच्चों का महके बचपन आदि पुस्तकें भी लिखी हैं।

Related Articles

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles