क्रिसमस डे पर कविता :- इक बूढा अंकल आता है | क्रिसमस त्योहार की कविता

पूरी दुनिया में हर साल 25 दिसंबर को मनाये जाने वाले क्रिसमस डे पर कविता:-

क्रिसमस डे पर कविता

क्रिसमस डे पर कविता

हर वर्ष दिसंबर माह ढले
इक बूढा अंकल आता है,
उपहार बांट सब बच्चों में
क्रिसमस त्यौहार मनाता है।

सूट बूट वह लाल पहनकर
टोपी भी सर पर रखता है
हाथों में दस्ताने उसके
दाढ़ी मूछों में जचता है,
जिंगल बेल जिंगल बेल का
वह गाना सदैव गाता है
उपहार बांट सब बच्चों में
क्रिसमस त्यौहार मनाता है।

सर्दी हो चाहे कड़ाके की
फिर भी कभी नहीं रुकता है
बर्फ पड़े चाहे कितनी भी
फिर भी वो देर ना करता है,
बच्चों से उसको प्यार बहुत
झोले में खुशियां लाता है
उपहार बांट सब बच्चों में
क्रिसमस त्यौहार मनाता है।

थैला लेकर उपहारों का
हर जगह घूमता दिखता है
घूम घूम कर सब बच्चों को
मिले वो जैसे फ़रिश्ता है,
कुछ खट्टे कुछ मीठें प्यारे
गीत वह सबको सुनाता है
उपहार बांट सब बच्चों में
क्रिसमस त्यौहार मनाता है।

मन में नहीं है द्वेष कोई
ना कोई कपट का भाव है
सब में आनंद बाँटना ही
लगता उसका स्वभाव है,
छोटे बड़े सभी को ही वह
अच्छी यादें दे जाता है
उपहार बांट सब बच्चों में
क्रिसमस त्यौहार मनाता है।

सब बच्चों को अपना माने
सब लोग उसका परिवार हैं
है भेदभाव का प्रश्न नहीं
उसमें प्रेम भरा अपार है,
सबको खुशियां देना ही बस
वो मानव धर्म बताता है
उपहार बांट सब बच्चों में
क्रिसमस त्यौहार मनाता है।

पढ़िए :- कविता ‘क्रिसमस आया क्रिसमस आया’


शिक्षक पर कवितामेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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