सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"

सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"
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कोटा, राजस्थान के रहने वाले सुरेश चन्द्र "सर्वहारा" जी स्वैच्छिक सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी (रेलवे) हैं। सुरेश जी एक वरिष्ठ कवि और लेखक हैं। ये संस्कृत और हिंदी में परास्नातक हैं। इनकी कई काव्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें नागफनी, मन फिर हुआ उदास, मिट्टी से कटे लोग आदि प्रमुख हैं। इन्होंने बच्चों के लिए भी साहित्य में बहुत योगदान दिया है और बाल गीत सुधा, बाल गीत सुमन, बच्चों का महके बचपन आदि पुस्तकें भी लिखी हैं।

दत्तात्रेय के २४ गुरु :- भगवान दत्तात्रेय के गुरुओं को समर्पित कविता

दत्तात्रेय के २४ गुरु | अगहन मास की पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय की जयन्ती होती है। अत्रि ऋषि और अनुसूया के पुत्र दत्तात्रेय समन्वयवादी...

नव वर्ष पर कविता :- नए वर्ष की भीनी खुशबू | नए साल पर कविता

नव वर्ष पर सभी एक दूसरे को शुभकामना देते रहते हैं और उनकी सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। ऐसी ही एक शुभकामना...

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पर कविता :- आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह पर कविता

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को -6 जनवरी 1885) आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह कहा जाता है। उनका जन्म 9 सितंबर 1850 में वाराणसी में हुआ था।...

शरद ऋतु पर कविता :- निकलो भी अब सूरजदादा | ठण्ड पर कविता

जो सूरज देवता गर्मी में आग बरसाते हैं शरद ऋतू में अक्सर उनके दर्शन भी दुर्लभ हो जाते हैं। इतना ही नहीं उनका ताप...
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