रक्षाबंधन पर कविता :- राखी का त्यौहार | राखी पर एक छोटी कविता

रक्षाबंधन, भाई और बहन के प्रेम को दिखाता एक पवित्र पर्व। एक ऐसा पर्व जो कई भावनाओं को समाहित किये हुए है। ये राखी सरहद पर जाती है, ये राखी बहनें मायके लेकर जाती हैं, ये राखी देश-परदेस में सफ़र करती है। और ये सिर्फ रेशम का धागा ही नहीं होता बल्कि भाई और बहन के प्यार का प्रतीक होता है। इन्हीं भावनाओं को समेटे हुए एक कविता आप के लिए हम लेकर आये हैं। तो आइए पढ़ते हैं रक्षाबंधन पर कविता  :-

रक्षाबंधन पर कविता

रक्षाबंधन पर कविता

रेशम के धागे में समेटे
भाई बहन का प्यार,
पूरे एक बरस में आता
राखी का त्यौहार ।

बाजारों में बिकती राखी
पर न मोल कोई इस रिश्ते का
बहन का अहुदा माँ समान है
भाई का सामान फरिश्ते का,
कभी बनती बहुत है आपस में
कभी होती है तकरार
पूरे एक बरस में आता
राखी का त्यौहार।

जब भाई सरहद पर होता
तो राखी चिट्ठी में जाती है
कब जाओगे बहन से मिलने
यही सवाल उठाती है,
कैसे बताए भाई बहना को
पूरा भारत उसका परिवार
पूरे एक बरस में आता
राखी का त्त्यौहार।

ससुराल से बहनें मायके जाएं
भाई की कलाई राखी से सजाएं
मुंह करवाकर मीठा उनका
माथे पर उनके तिलक लगाएं,
बदले में भाई से पाती
सुंदर-सुंदर से उपहार
पूरे एक बरस में आता
राखी का त्यौहार।

रिश्ते कई हैं दुनिया में
पर ये रिश्ता कुछ खास है
राखी के धागों संग बंधता
हाथों पर विश्वास है
बहन की खुशियों की खातिर
भाई जान भी देता वार
पूरे एक बरस में आता
राखी का त्यौहार।

पढ़िए :- रक्षाबंधन का इतिहास महत्त्व व् जानकारी

इस कविता के बारे में अपने विचार हम तक कमेंट बॉक्स के जरिये जरूर पहुंचाएं। यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हामरे ब्लॉग के जरिये लोगन तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ blogapratim@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

धन्यवाद।

अभी शेयर करे
WhatsAppFacebookTwitterGoogle+BufferPin It

Add Comment