एकलव्य की कहानी | महान धनुर्धर एकलव्य की जीवन कथा

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6 लोगो के विचार

  1. मनोज रामेश्वर माध्यानि says:

    जिसे शिक्षा लेनी हो या कुछ भी पाना हो तो मन में एकलव्य की भाति ठान लेना चाहिए।की चाहे जो भी हो मुझे जो सीखना या पाना है वह पाके रहूंगा।

    • Mr. Genius says:

      सही बात कही अपने मनोज रामेश्वर माध्यानि जी। जब सिर पे जुनून चढ़ जाता है तो हर चट्टान एक छोटा पत्थर नजर आता है अपने विचार पाठकों तक पहुँचाने के लिए धन्यवाद।

  2. सुधीर says:

    बहुत बढ़िया गुरु के बिना जो सीखे बही तो असली धनुर्धर है। मई एकलब्य के जगह होता हो द्रोण चर्य को अंगूठा तो क्या सर का बाल तक न देता।

    • Mr. Genius says:

      सुधीर जी आपकी सोच आज के ज़माने के हिसाब से सही है लेकिन उस समय तो अगर कोई किसी को एक बार गुरु मान लेता था तो सारी जिंदगी उसका शिष्य ही रहता था। शायद इसीलिए उस समय गुरु-शिष्य का रिश्ता पवित्र था।
      खैर ये तो अपनी – अपनी सोच की बात है। अपने विचार प्रकट करने के लिए धन्यवाद।

  3. DEVARAKONDA KOTESWARA RAO says:

    Sir,
    I am working has Professor of Civil Engineering in University College of Engineering, JNTUK KAKINADA- 533 003, Andhra Pradesh.
    I am very much interested to the life history of Ekalavya in English / Telugu, so that I can explain very point about Ekalavya to my students and known people.
    I felt it is essential to educate the public in the matter of Ekalavya's life history, because no one knows exactly the life history Ekalavya in our area and some are talking false also.
    Please kindly sent the material in connection with the history of Ekalavya and I am ready to pay the necessary charges

    with regards
    Dr. D. Koteswara Rao
    Professor of Civil Engineering,
    JNTUK KAKINADA- 533 003
    EAST GODAVARI DISTRICT
    A.P
    CELL :: 070934 71555

    • Mr. Genius says:

      We'll always try to help you just contact us on the following email ID
      [email protected]
      Thanks.

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