उपन्यास ज़हर खरीदी | एक बिज़नस फॅमिली की कहानी | पुस्तक समीक्षा

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“हमारे देश से प्यार सिर्फ हम ही नहीं करते बल्कि वो लोग भी करते है जो झूठे हैं, करप्ट हैं और पैसों के लिए कुछ भी कर सकते हैं। उल्टा ये सब लोग भारत को हमसे ज्यादा प्यार करते हैं।” ये लाइन है लेखक अविराम के हिंदी उपन्यास ज़हर खरीदी से। हम आये दिन कितने की कहानियां पढतें-सुनते-देखते रहते है। कुछ मनोरंजन के लिए होते है। किसी में कुछ मेसेज होता है। ये उपन्यास लेखक अविराम ने पर्यावरण प्रदूषण और ऐसे ही सामाजिक मुद्दे को लेकर लिखा है। उपन्यास के माध्यम से लोगों तक पर्यावरण प्रदूषण के बारे में जागरूकता पैदा करना उसके उपन्यास का मुख्य उद्देश्य है। आइये जानते है इस उपन्यास में क्या है खास और क्या आम।

उपन्यास ज़हर खरीदी  |  Book review

उपन्यास ज़हर खरीदी पुस्तक समीक्षा

उपन्यास एक नजर में:

शीर्षक  :  ज़हर खरीदी
लेखक  :  अविराम
प्रारूप   :  उपन्यास
पृष्ठ     :  121
ब्लॉग  :  www.authoraviram.com

उपन्यास ज़हर खरीदी का मुख्य सार:

दुष्यंत एक युवा बिजनेसमैन है, जो अपने पापा और उसके दोस्त के बिज़नस को साथ मिलके चला रहे थे। पूरी कहानी दुष्यंत और उसके फैमिली के आसपास ही चलती है। एक एक्सीडेंट में उसकी माँ चल बसती है। जब दुष्यंत इस बात की थोड़ी तहकीकात करता है तो वह इस नतीजे पर पहुँचता है कि उनके खुद के कंपनी के प्रोडक्ट्स में खामियां है या उनके कंपनी में कमजोरियां है।

उसके बाद वो कंपनी में एक्टिव रूप से काम करने के बजाय अपना अधिकतर समय ट्रेवलिंग में बिताता है। इस दौरान वो फ़िरोजाबाद की बस्ती में गरीब और कुछ नशे के लत के शिकार बच्चों को पढ़ाने में भी अपना समय बिताता है जिसमें वो बेहद सफल होता है। दुष्यंत का बड़ा भाई अविनाश है, जो कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से बिज़नस की पढ़ाई करके आता है और अपने पापा के बिज़नस में शामिल हो जाता है।

दुष्यंत की एक छोटी बहन है काव्या जो अभी कॉलेज के पहले वर्ष में है। लेकिन अपने कॉलेज के एक लड़के से वो प्यार करती है जिसका पता दुष्यंत और उसके पिता को चल जाता है। दुष्यंत इसे अपने तरीके से सोल्व करने में लग जाता है, जिसके लिए वो एक टूर प्लान करता है जिसमें वो लड़का भी साथ होता है।

टूर के अंत होते-होते दुष्यंत काव्या से कहता है की वो लड़का उसके लिए सही नहीं है। फिर शर्त के मुताबिक अब काव्या को उस लड़के से रिश्ता तोड़ना होता है। लेकिन ये बात काव्या को नागवार गुजरती है और आगे चलके वो फिर ऐसा कुछ करती है जिससे उसके परिवार में टकराव शुरू हो जाता है। फिर उस टकराव से परिवार को टूटने से दुष्यत कैसे बचाता है, और एक बड़ी डील जिसके आधार पे टकराव शुरू होता है उसे वो कैसे टाल पाता है ये इस कहानी में है।

लेखन:

अविराम जी का लेखन बहुत ही दिलचस्प है। लम्बे वाक्यों को भी वो आसानी से समझाने में सफल है। एक परिवार के बीच रिश्तों में होने वाली बातों को वो बड़े ही दिलचस्प तरीके से पेश करते है। चाहे भाई-बहन के बीच होने वाली बातें हो या फिर पिता और पुत्र के बीच। वो अच्छे तरीके से इसके बीच के कन्वर्सेशन को पेश करते है। अगर कभी आपको कहानी धीमी या बोरियत भरी भी लगे तो उंनका लेखन आपकी दिलचस्पी बनाए रखेगा। जैसा की लेखक ने बताया है की उनका अब अधिकतर समय घुमक्कड़ी में बीतता है तो उनके अनुभवों का असर भी इस उपन्यास में देखने को मिलता है।

उपन्यास की खास बातें:

इस उपन्यास का मुख्य उद्देश्य आम लोगो को पर्यावरण प्रदूषण और बाजार में मिलने वाली दुसरे धीमी ज़हर के प्रति लोगों को जागरूक करने का है। जो धीमी ज़हर लोग अपनी सहूलियत के लिए खरीदते है लेकिन उन्हें पता भी नहीं होता की वो क्या कर रहे हैं। उपन्यास ज्यादा लम्बा नहीं है तो जो लोग ज्यादा पढ़ने वाले नहीं है उनको ये किताब अच्छी लगेगी। कहानी एक बिजनेस फैमिली की है लेकिन सारी घटनाएँ समझना आसान है। फ़िरोजाबाद, सिलीगुड़ी, गंगटोक जैसी जगहों की सुन्दरता का वर्णन भी इसमें मिल जाता है।



उपन्यास की कमजोरियां:

जो इस उपन्यास में कमी मुझे महसूस हुयी वह ये है कि, बहुत सी बातें इसमें बिखरी हुई सी है। बातें अलग-अलग दिशाओं में जाती है और समाप्त हो जाती हैं। उपन्यास का मुख्य किरदार दुष्यंत अपनी कंपनी को छोड़ के ट्रेवलिंग क्यों शुरू कर देता है? एक बच्चे की एक्सीडेंट में मौत की कहानी वो अपने परिवार को सुनाता है उसमें वो क्या साबित करता है?

अंत में वो जिस मुख्य मुद्दे अर्थात पर्यावरण प्रप्रदूषण को समझाने की कोशिश करता है वो भी मुझे स्पष्ट नहीं लगा। मैंने इस उपन्यास का अंत दो बार पढ़ा है लेकिन जो बात ये उपन्यास समझाना चाहता है उसमें स्पष्टता की कमी मुझे महसूस हुयी? जिस कंपनी डील के ऊपर ये उपन्यास है उस डील को दुष्यंत क्यों तोड़ना चाहता है? और अंत में उसका होता क्या है?

काव्या और उस लड़के के बीच के लव स्टोरी को लम्बा खींचने की जरुरत नहीं थी जब ये सिर्फ काव्या के मन में असंतोष ही डालने के लिए था तो। टूर में जब दुष्यंत अपनी बहन को कहता है की वो लड़का सही नहीं है क्योंकि उसने ड्रग का रेट बता दिया था तो लगता है की वो लड़का ड्रग एडिक्ट या उस धंधे से संबध रखता होगा लेकिन अंत में कारन कुछ और ही निकलता है या स्पष्ट कारण नहीं निकलता।

और अंत में:

शुरू में कवर और टाइटल देख के मुझे ऐसा लगा था की ये किसी सामाजिक मुद्दे पर लिखी गयी है। फिर जब कहानी शुरू होती है लगता है की कहानी दो कंपनी के बीच टकराव की है। बाद में आगे बढ़ती है तो इसमें पारिवारिक ड्रामा शामिल है जो मुझे हिंदी टीवी सीरियल जैसा महसूस हुआ। जिन लोगों को हिंदी टीवी सीरियल देखना पसंद है उनको ये उपन्यास बहुत पसंद आएगा। फिजिकली बुक और इसकी क्वालिटी बढ़िया है लेकिन इसका कवर डिजाईन मुझे अच्छा नहीं लगा।

अगर आप किसी मुद्दे के साथ आज के समय की रीयलिस्टिक कहानियां पढ़ने में रूचि रखते है तो ये उपन्यास ज़हर खरीदी आपको जरुर पसंद आएगा।

आप ये किताब यहाँ से खरीद सकते है:


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