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किसान पर कविता

किसान का दर्द कविता :- अन्नदाता की सुनो पुकार | किसान पर कविता – 2

किसान इस देश के अन्नदाता हैं फिर भी उनकी स्थिति आज के दौर में बहुत ही दयनीय हो रही है। खेती कर पर कभी उसे सूखे की मार झेलनी पड़ती...

किसान पर कविता

किसान पर कविता :- ये धरा ही उसकी माता है | Kisan Par Kavita

बिना गाँव और बिना किसान किसी भी देश का संपूर्ण होना संभव नहीं है। अगर देश के अन्नदाता न हों तो देश भूखा ही मर जाए। लेकिन समय की विडंबना...