गधे और कुत्ते की कहानी :- चोर कौन? | बंडलबाज गधा भाग 3

शाम को बंडलबाज गधा कुत्ता दादा की हुयी बेइज्जती से बहुत दुखी था। उसे पता था कि चोरी उसने नहीं की थी। बंडलबाज गधा किसी भी तरह कुत्ता दादा को उसका सम्मान वापस दिलाना चाहता था। सारी रात सोचते-सोचते बीत रही थी। सुबह होने ही वाली थी कि बंडलबाज गधे को एक विचार आया। वो सीधा ही उल्लू सुनार के पास गया।

उल्लू सुनार जंगल में सबके लिए गहने बनाता था। रात को जागने के कारण वो अक्सर ही सारा काम रात को करता था जब सब सो रहे होते थे।इस तरह कोई उसे तंग भी नहीं करता था ऑयर वो अपना काम भी शांति से कर लेता था।

बंडलबाज गधा उल्लू सुनार के पास पहुंचा और उसे किसी तरह हुबहू वैसा ही हार बनाने के लिए कहा जैसा हार चोरी हो गया था। उल्लू सुनार बड़ी मुश्किल से माना। उसे मानना ही पड़ा क्योंकि बंडलबाज गधा उस समय राजा था और उल्लू को पता था कि हार के चोरी होने में गधे का कोई हाथ नहीं है।

अगली रात को जब सब सो रहे थे तो बंडलबाज गधा उल्लू सुनार के पास से वो हार ले आया। इस बात के बारे में किसी को कुछ भी न पता चला। बंडलबाज गधे ने हार लाकर चुपचाप सुंदरी हिरनी के कमरे में दरवाजे के पीछे ऐसे रख दिया मानों गलती से गिर गया हो। इसके बाद जाकर वह शांति से सो गया।



“हार मिल गया….हार मिल गया…” ये आवाज सुंदरी हिरनी की थी। इस आवाज को सुन बंडलबाज गधा हैरान तो न था क्योंकि ये सब उसी का किया धरा था। लेकिन फिर भी एक्टिंग करते हुए कहने लगा,

“ढेंचू…ढेंचू…..अरे हिरनी जी हार मिल गया। मैं तो पहले ही कहता था कि मेरा दोस्त कुत्ता दादा चोरी नहीं कर सकता।”

“हाँ जी…बात तो आप सही कह रहे हैं। हम सब से बहुत बड़ी गलती हो गयी कुत्ता दादा पर शक कर के।”

हिरनी ने चिंता जताते हुए कहा।

“मैं आज ही सब जंगल वासियों को इकठ्ठा करता हु और उन्हें हार मिलने की खबर सुनाता हूँ। इसके साथ ही कुत्ता दादा को भी सम्मानपूर्वक जंगल में वापस लेकर आता हूँ।”

इसके बाद सभी जंगलवासियों को इकठ्ठा किया गया। बंडलबाज गधा ने जंगल के ही भोलू कुत्ते को कुत्ता दादा को बुलाने के लिए भेज दिया।

शाम होते-होते सभी जंगलवासी बंडलबाज गधे की गुफा के सामने पहुँच चुके थे। सभी ये जानने के लिए उत्सुक थे कि हार कहाँ और कैसे मिला?

“सभी जंगल वासियों को मेरी हाय और हेल्लो। जैसा कि आप सब को पता है कि कुछ दिन पहले सुंदरी हिरानी का शाही हर गुम हो गया था। वो शाही हार कल रात उन्हीं के कमरे से मिल गया है……..”

“लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है?

बीच में टोकते हुए शेर सिंह के ये कहने पर सब जंगलवासी उसकी तरफ देखने लगे। किसी को ये समझ नहीं आया की शेर सिंह ने ऐसा क्यों कहा?

“ये क्या कह रहे हैं आप शेर सिंह जी? ऐसा क्यों नहीं हो सकता?”

“क्योंकि असली हार यहाँ है।”

एक बार फिर से बंडलबाज गधे को रोकने वाली ये आवाज कल्लू लोमड़ी की थी जो हार लिए वहाँ खड़ा था। उसके हाथों में हार देखते ही बंडलबाज गधे के पसीने छूटने लगे। तभी लम्बू जिर्राफ बोला,

“इसका मतलब गधे के पास नकली हार है। ये तो धोखा है।”

“धोखा है धोखा है….” सभी जंगलवासी बंडलबाज गधे के सामने ऊंची-ऊंची आवाज में नारे लगाने लगे। सभी लोग अलग-अलग तरह की बातें कर रहे थे। कोई कह रहा था कि गधे का गधा ही रहा। वो तो अच्छा है की कल्लू लोमड़ी असली हार ले आया वर्ना इसने तो सबको बेवक़ूफ़ बना दिया होता।

तभी जानवरों के बीच से किसी जानवर ने कहा कि हमारे साथ इतना बड़ा खेल क्यों खेला? हमें जवाब चाहिए…हमें जवाब चाहिए।

बंडलबाज गधे कि हालत पतली होती जा रही थी। उसे समझ नही आ रहा था कि अब क्या करे? उसे तो बस अब अपनी मौत ही दिखाई दे रही थी। राजा का पद तो गया ही गया सुंदरी हिरनी भी हाथ से जायेगी। जंगल में बदनामी हो रही है सो अलग।

गधे कि ये हालत देख कर शेर सिंह और कल्लू लोमड़ी ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे थे। जंगलवासी गधे के खिलाफ नारे लगा रहे थे। तभी बंडलबाज गधे को सभी जानवरों के पीछे भोलू कुत्ते के साथ कुत्ता दादा आता दिखा। तभी उसके मन में एक ऐसी बिजली कौंधी जिसने सारा दृश्य ही बदल दिया।



“ढेंचू….ढेंचू……हाहाहाहाहाहा……..”

गधा जोर-जोर से हंसने लगा। उसे देख कर एक पल के लिए पूरे जंगल में सन्नाटा छा गया। किसी को कुछ भी समझ न आया। शेर सिंह और कल्लू लोमड़ी को को लगा की गधा पगला गया है।

“मेरा प्लान कामयाब हो गया….हाहाहाहाहाहा….”

गधे की ये बात सुन सब चौंक गए।

“ये किस प्लान की बात कर रहा है?”

असमंजस में पड़ते हुए शेर सिंह ने कल्लू लोमड़ी से पूछा।

“मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा महाराज। ये हो क्या रहा है?”

तभी बंडलबाज गधा बोला,

“मुझे पता था कि हार गायब नहीं हुआ है बल्कि चुराया गया है।”

“चुराया गया है?” बीच में से हाथी बोला, “तो आपने पहले क्यों नहीं बताया?”

“वो इसलिए कि मैं जानता था कि जिसने भी हार चुराया है वो खुद तो सामने आयेगा नहीं। इसलिए मैंने ये नकली हार वाला प्लान बनाया। और इसका नतीजा आप सबके सामने है। कल्लू लोमड़ी।”

इतना सुनते ही कल्लू के पैरों तले जमीन खिसक गयी। उसे ऐसा लगा मानो सारा आसमान उसके सर पर टूट पड़ा हो। “महाराज आप ये क्या कह रहे हैं? मैंने ये हार नहीं चुराया…..”

“ना तू हार क्यों चुराएगा, मैंने ही तो तुझको दिया होगा न। क्योंकि हार तो मैंने चुराया था।”

कुत्ता दादा वहां पहुँच चुका था। सभी जानवरों की नजरें कुत्ता दादा पर टिक गयी थीं।

“इसी ने हार चुराया और मुझे और महाराज गधे को बदनाम करने की साजिश रची। लेकिन सच आखिर कब तक छुपता है। पकड़ लो सब भाई लोग और धो डालो इसको। इसने जंगल के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया है।”

कुत्ता दादा की ये बात सुन कर कल्लू को ऐसे लगा जैसे साक्षात् यमराज सामने खड़े होकर उससे कह रहे हों कि चलो अब तुम्हारा वक्त ख़तम हुआ।

“मैंने कुछ नहीं किया। ये हार तो मुझे जंगल में मिला था। आप चाहें तो शेर जी से पूछ लीजिये।”

इस समय शेर सिंह ने लोमड़ी का साथ देना सही न समझा। क्योंकि ऐसा हो सकता था कि जंगलवासी कल्लू लोमड़ी के साथ शेर सिंह की भी हालत ख़राब कर देते।

“मुझसे क्या पूछो कल्लू? तुम्हें पता होगा तुमने क्या किया? तुम्हें हार कहाँ से मिला? मेरा नाम मत लो इस सब में हाँ।”

“बस कल्लू, देख लिया तुमने बुरे काम का क्या अंजाम होता है। तो जंगलवासियों इस लोमड़ी को क्या सजा देनी चाहिए?”

बीच में से ही कोई जानवर बोला, “इसे हमारे हवाले कर दो महाराज। हम इसे खुद ही यमराज के पास पहुंचा देंगे।”

तभी कुत्ता दादा बोला,”नहीं इसको मरने की जरूरत नहीं है। इसको जंगल से बहार निकाल दो इस नमक हराम को।”

कल्लू लोमड़ी अब भी शेर सिंह की तरफ ऐसे देख रहा था मानो कह रहा हो महाराज बस एक बार बचा लो। लेकिन शेर सिंह कल्लू लोमड़ी से नजरे चुराए जा रहे थे। तो अंत में बंडलबाज गधे ने फैसला सुनाया,

“जंगल के नियम तोड़ने और शाही हार की चोरी के आरोप में कल्लू लोमड़ी को जंगल से बाहर निकला जाता है। इसके साथ ही कुत्ता दादा को ससम्मान जंगल में रखा जायेगा। उनके साथ हुए बुरे व्यव्हार के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। अब आप सब लोग अपने अपने घर जा सकते हैं। धन्यवाद।”

इसके बाद सब जानवर अपने-अपने घर की ओर चले गए। शेर सिंह और कल्लू लोमड़ी वहीं खड़े थे।

“क्यों, तुम्हें कहा था न कि बोलने की अकाल सीख लो। तुम्हें तो ये भी नहीं पता कि कौन सी बात कब कहनी है। हार तो चुराया लेकिन इस का फ़ायदा कैसे उठाना है इस पर दिमाग नहीं लगाया। और अपने गधा भाई को देख कैसे एक ही मिनट में तुम्हारी सारी चालाकी फुरररर कर दी। जंगल का इतिहास उठा कर देखो लोमड़ी कितनी भी चालाक रही हो उसने हमेशा मुँह की खायी है। तो अब निकलो यहाँ से जल्दी।”

इतना कह कर बंडलबाज गधा, सुंदरी हिरनी और कुत्ता दादा वापस गुफा में चले गए।

कल्लू लोमड़ी ने शेर सिंह से कहा,

“महाराज आपने कुछ कहा क्यों नहीं? मैंने ये सब आपके लिए ही तो किया था।”

शेर सिंह एक लम्बी सांस लेते हुए कहा,

“कल्लू तूने ही तो कहा था कि जब प्रजातंत्र में सब गधे को ही राजा बना दें तो उसकी दुलत्ती तो खानी ही पड़ेगी।”

इतना कहते ही शेर सिंह आगे बढ़ गया और कल्लू लोमड़ी वहीं खड़ा उसे देखता रहा।



तो ये था बंडलबाज गधा श्रृंखला कहानी का तीसरा भाग ” गधे और कुत्ते की कहानी :- चोर कौन?” ये कहानी आपको कैसी लगी हमें जरूर बताएं। यदि आप चाहते हैं पढ़ना इस कहानी का चौथा भाग तो कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताइए। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें लिखने के लिए प्रेरित करती है।

बेहतरीन कहानी, कविताएँ, शायरियां और रोचक जानकारियों के लिए बने रहें अप्रतिमब्लॉग के साथ।

धन्यवाद

Add Comment

Safalta, Kamyabi par Badhai Sandesh Card Sanskrit Bhasha ka Mahatva in Hindi Surya Ke Bare Mein Jankari | Surya Ka Tapman Vyas Prithvi Se Doori 25 Famous Deshbhakti Naare and Slogan आधुनिक महापुरुषों के गुरु कौन थे?