एकाग्रता कैसे बढ़ायें? मन को एकाग्र करने के कुछ आसान अभ्यास

हमने पहले एक लेख पढ़ा था लक्ष्य कैसे प्राप्त करें? वो लेख एक सवाल के साथ ख़त्म हुआ था कि एकाग्रता कैसे बढ़ायें? हम में से कई लोग इस समस्या से जूझते हैं कि वो अपना लक्ष्य तो प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन वो एकाग्र होकर अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ नहीं पाते।

कभी उनको अपना लक्ष्य दूर लगता है और वो अपना लक्ष्य ही बदल लेते हैं। या फिर उन्हें कोई और आदमी मिलता है और आकर कहता है कि देखो मैं ये कर रहा हूँ तुम भी यही करो। जो तुम कर रहे हो वो बहुत मुश्किल है और उससे तुम्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला।

पढ़ने वाले छात्रों के साथ अक्सर ऐसा ही होता है कि उन्हें मिलने वाले मित्र उनसे कहते हैं कि वो ये कोर्स छोड़ कर कोई और ज्वाइन कर लें। और ताज्जुब तो ये है कि ज्यादातर लोग उनकी बातों में आकर अपना लक्ष्य बदल भी लेते हैं।

एकाग्रता कैसे बढ़ायें?

एकाग्रता कैसे बढ़ायें

एकाग्रता शब्द तो बना ही एकाग्र के भाव से है। एकाग्र के भाव से अर्थ है एक ही विषय में ध्यान लगाना। मन को किसी भी स्थिति में शांत रखना। एकाग्रता तो वो स्थिति होती है जो इन्सान के अन्दर की शक्तियां जागृत कर देती है। अब यदि आप अपना विषय ही बदल रहे हैं या फिर आपको अपने लक्ष्य की तरफ पहुँच पाने का विश्वास नहीं है तो आप एकाग्र नहीं हैं।

जब सीता जी को ढूँढने के लिए हनुमान जी को सागर पार करना था। उस समय एक श्राप के कारण वो अपनी शक्तियां भूल गए थे। उन्हें स्वयं पर विश्वास नहीं था कि वो समुन्दर पार कर लेंगे। उनका लक्ष्य था सीता जी को ढूंढना। लेकिन मन में उस श्राप का ख्याल और स्वयं पर विश्वास न होने के कारण उन्होंने ने जाने से इंकार कर दिया। वही समय था जब उनके साथियों ने उन्हें शांत मन से बैठ कर अपनी शक्तियों को याद करने को कहा।

कई ख्यालों के भंवर में शक्तियों को दुबारा याद कर पाना आसान न था। लेकिन उन्होंने मन को एकाग्र किया और सब ख्यालों को अलग करते हुए अपनी शक्तियों को पाने में सफल हुए।

इसी तरह हमारे मन में भी ख्यालों का एक उलझा हुआ जाल होता है। जिसे सुलझाने पर ही हम एकाग्र होते हैं। कैसे सुलझाया जाए इन उलझे हुए ख्यालों को आइये जानते हैं एकाग्रता बढ़ाने के कुछ आसान उपाय :-

१. एकाग्रता मंत्र :- किताबें पढ़िए

हो सकता है इसे सुनकर किसी को हंसी आ जाए कि किताबें पढ़ कर एकाग्रता कैसे बनायीं जा सकती है। लेकिन ये सबसे सरल तरीका है एकाग्रता बनाने का। जब हम किसी चीज को बार-बार पढ़ते हैं तो वो हमें आसानी से याद हो जाती है। और पढ़ने के दौरान किताब को दिया गया समय हमारी एकग्रता को बढाता है। आप अगर दस या बीस मिनट भी किताब पढ़ते हैं तो ये ध्यान लगाने के बराबर ही है।

इसे अपनी आदत का एक हिस्सा बनाये। अगर आप विद्यार्थी हैं तो अपने विषय की किताबें पढ़ें। किताब सिर्फ पढ़ने के लिए न पढ़ें। इसे समझने की कोशिश करें। समझ आने पर आपको पढ़ना आसान लगेगा और मजा भी आएगा। पढ़ते समय अगर आप को समझने में कुछ समस्या आती है तो हिम्मत मत हारिये बस ये पंक्तियाँ दोहराइए।

” मैं समझ सकता हूँ।”

और उसके बाद आप कुछ भी कर सकते हैं।

यदि आप कोई अन्य कार्य करते हैं तो अपनी दिनचर्या में किताब पढ़ने का समय जरूर तय करें।

२. एकाग्रता के लिए योग :- ध्यान लगाये

ध्यान लगाने से मन एक जगह केन्द्रित रहता है। और नियमित तौर पर ऐसा करने से जब मन अच्छी तरह केन्द्रित होने लग जाता है तो इसी स्थिति को एकाग्रता कहते हैं। बड़े-बड़े खिलाड़ी भी अपनी एकाग्रता बनाने के लिए ध्यान लगाते हैं। जुडो-कराटे और मार्शल आर्ट्स में तो ध्यान लगाना भी प्रशिक्षण का ही एक हिस्सा होता है।

अक्सर कई लोग ध्यान लगाना इसलिए छोड़ देते हैं कि ध्यान के दौरान भी उनके दिमाग में सांसारिक विचार चलते रहते हैं। लेकिन अगर आप मिट्टी लगे हीरे को धोएँगे तो पहले उसमें से मिटटी ही साफ होगी। उसके बाद ही हीरा साफ़ होगा। इसी तरह मन में आने वाले ख्यालों को आने दीजिये। असल में तो वो आपके मन से बाहर निकल रहें हैं। इनके बाहर निकलने के बाद आपको मानसिक तौर पे शांति का अनुभव भी होगा और आप अपनी एकग्रता शक्ति को पहले से मजबूत पाएँगे।

३. एकाग्रता के लिए व्यायाम:-

व्यायाम करने से काफी हद तक मानसिक तनाव कम होता है। तनाव कम होने से मन को शांति प्राप्त होती है। और यदि आप नियमित रूप से व्यायाम करते हैं तो आपकी जिंदगी काफी खुशनुमा होगी। व्यायाम सिर्फ शरीर को ही तंदरुस्त नहीं रखता बल्कि मन भी तंदरुस्त रहता है। व्यायाम के दौरान हमारा ध्यान हमारी क्रियाओं पर केन्द्रित रहता है। और इस तरह व्यायाम करना हमारी एकाग्रता को बढ़ाता है।

४. जो करना है उसे किसी भी हालत में करिए :-

यदि आपको कोई ऐसा काम मिला है जो आपको पसंद नहीं और करना ही पड़ेगा तो उसे जल्दी और पहले ख़त्म कीजिये। ये कैसे हो सकता है? यही सोच रहें हैं ना आप?

क्यों नहीं हो सकता?

जब भी ऐसा कोई काम आपको मिलता है और वो आपको करना ही पड़ेगा तो उस काम में देरी करने से वो आपको मानसिक परेशानी दे सकता है। वह आपके मन में एक अलार्म की तरह बजता रहेगा। और आप मानसिक तनाव के शिकार भी हो सकते हैं। और यदि ऐसे समय में आप उस से पहले और कोई काम करते हैं तो उस पर भी गलत प्रभाव पड़ सकता है।

तब आप बाद में होने वाले नुकसानों के बारे में सोच कर उस काम को पहले ही आसानी से ख़त्म कर सकते हैं क्योंकि आप ये नहीं चाहेंगे की आपको बाद में किसी परेशानी का सामना करना पड़े। ऐसे समय मैं उस उबाऊ काम को पहले कर लेने से आप में विश्वास आ जाता है कि आप कुछ भी कर सकते हैं। और फिर आपके मन को मिल जाती है एकाफ्र्ता की शक्ति तो आप भविष्य में ऐसे कई काम आप चुटकियों में कर सकते हैं।

इनमें से कोई एक तरीका भी आपनाने पर आप पाएँगे की आपकी एकाग्रता शक्ति बढ़ रही है। इस तरह आप जब अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त हो जाएँगे तो आप उसे अवश्य प्राप्त कर लेंगे। आपका मन अपने लक्ष्य से कभी नहीं भटकेगा।

तो ये कुछ तरीके थे जो आपको एकग्रता प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं। आपको यह लेख ‘ एकाग्रता कैसे बढ़ायें? ‘ कैसा लगा? इस लेख के प्रति आपकी जो भी राय है। निःसंकोच कमेंट बॉक्स में लिख कर हमें बतायें।

धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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4 Responses

  1. manish pandey कहते हैं:

    thanks sir very importent knowledge

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