वो भिखारी- लेखक के साथ एक घटना | Wo Bhikhari

वो भिखारी

वो भिखारी

ये घटना कब की है मुझे ठीक से तो याद नही, पर ये 2009-10 का समय था। जब मै एक टेलिकॉम कंपनी में सेल्समेन था। उस समय मै बस स्टैंड में खड़ा बस का इन्तेजार कर रहा था।
अचानक ही एक व्यक्ति मेरे पास आया। जो दिखने में करीब 50 साल के उम्र का लग रहा था। 
मैंने सोचा की वो भिखारी एक सामान्य भिखारी होगा। पर मै तब चकित हो गया, जब उसने बताया की वो एक टूरिस्ट है।

मेरे पूछने पर उसने बताया की उसका गाँव यहा से 30-35 किमी. दूर है। और उसने बताया की किसी ने उसकी जेब काट ली थी। और कोई उसकी मदद करने वाला नही था। इस प्रकार के व्यक्ति से मै ये पहली बार मिला था। इसलिए मुझे समझ नही आ रहा था की मै क्या करू?

 मैंने एक पुलिस वाले की तरह उससे पुछताछ किया था। और उसने मेरे हर सवालों का जवाब दिया था। उसने यही दिखाया की वो अभी कुछ भी करने में असमर्थ है। इस कम समय में हुए लम्बे बातचीत और पूछताछ के बाद उसने मुझे अपनी मदद करने के लिए राजी कर लिया।

मैंने देखा तो पाया की मेरे पास सिर्फ 10रु ही अतिरिक्त थे। मैंने सोच लिया की ये पैसे उसे दे दूंगा। पर वो अपनी स्थिति को बताके ज्यादा मांगने लगा। और कहा की उसे एक बार ऑटो भी बदलना पड़ेगा।मैंने उसे एक उपाय बताया की वो घर पहुँच के भी ऑटोवाले को पैसे दे सकता है। जब बात नही बनी तो उसने 10रु लिया और चलते बना।

 मै वो घटना भूल गया। कुछ महीनो बाद मै अपने काम के सिलसिले से रेलवे स्टेशन गया था। वहां मुझे एक आदमी दिखाई दिया पहले तो मैंने उसपे ध्यान नही। दिया पर बाद में मुझे याद आया और मै उसे पहचान गया, की ये तो वही आदमी था, जिसे मै पहले मिला था।

इस समय वह किसी दुसरे व्यक्ति को अपनी वही समस्या दुसरे तरीके से बता रहा था। ये देख के मेरे चेहरे में हल्की सी मुस्कराहट आ गयी और मुझे ऐसा महसूस हुआ की मैंने इसके “ड्रामा” के लिए पैसे दिए थे। जिसमे अनजाने में मै भी शामिल था। उसका यह तरीका बढ़िया था। पर किसी अनुभवी व्यक्ति के लिए नही। मै उस जगह को छोड़ के अपने रास्ते बढ चला।

यह मेरे लिए एक अलग तरीके का अनुभव था। अब मै ऐसे किसी भी इंसान पे भरोसा नही करता। पर जब भी मुझे वो घटना याद आती है मै मुस्कुरा देता हु।


 पढ़िए ये घटनाए-

Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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