Tagged: प्रेरक कविताएँ

बंजर है सपनों की धरती

पिता पर कविता – बंजर है सपनों की धरती | पिता का दर्द बयान करती कविता हिंदी में

हमें जन्म देने वाले हमारे पिता जो हमारे लिए अपना सारा जीवन दुखों और परेशानियों में बिता देते हैं। पर बदले में आज की युवा पीढ़ी क्या कर रही है? आज बस अपने स्वार्थ...

अख़बार – खबर वही डेट नयी | अख़बार पर एक हिंदी कविता

अकसर देखा जाता है कि अख़बार पढ़ना कई लोगों की आदत होती है। सुबह और कुछ मिले न मिले उन्हें अख़बार जरूर मिलना चाहिए। सबको ये उम्मीद रहती है की शायद कोई ऐसी खबर...

bhatka hua rahi- inspirational kavita

मुझे अपनी मंजिल को पाना है | Inspirational Hindi Kavita

मुझे अपनी मंजिल को पाना है भटकता हुआ मैं राही नहीं हूँ आगे बढ़कर मुझे अपनी मंजिल को पाना है। देख चट्टानों सी मुसीबतों को ना हिम्मत हारनी है चीर कर इनका सीना मुझे...