पिता पर शायरी | पिता को समर्पित शायरी संग्रह By संदीप कुमार सिंह

प्रिय पाठकों, पिता से संबंधित इस शायरी संग्रह का अर्थ यह नहीं कि मेरे मन में माँ’ के प्रति प्रेम-भाव नहीं है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि कुछ दिन पहले मुझे मेरे एक मित्र ने मुझसे यह प्रश्न किया था कि मैं पिता के बारे में ज्यादा क्यों लिखता हूँ? तो मैंने जवाब दिया था कि माँ के बारे में तो सारी दुनिया लिखती है। मेरे पिता जी ज्यादा समय घर से बाहर ही रहते हैं शायद यही कारन है कि मेरे मन में पिता से संबंधित विचार ज्यादा आते हैं। यह बात सबको स्पष्ट रहे कि मेरे लिए माता-पिता दोनों समान हैं। मेरी तरफ से यह ‘पिता पर शायरी’ शायरी संग्रह विश्व के हर पिता को समर्पित है।

पिता पर शायरी

पिता पर शायरी

1.
चट्टानों सी हिम्मत और
जज्बातों का तुफान लिए चलता है,
पूरा करने की जिद से ‘पिता’
दिल में बच्चों के अरमान लिए चलता है।

2.
बिना उसके न इक पल भी गंवारा है,
पिता ही साथी है, पिता ही सहारा है।

3.
न मजबूरियाँ रोक सकीं
न मुसीबतें ही रोक सकीं,
आ गया ‘पिता’ जो बच्चों ने याद किया,
उसे तो मीलों की दूरी भी न रोक सकी।

4.
हर दुःख हर दर्द को वो
हंस कर झेल जाता है,
बच्चों पर मुसीबत आती है
तो पिता मौत से भी खेल जाता है।

5.
बेमतलब सी इस दुनिया में
वो ही हमारी शान है,
किसी शख्स के वजूद की
पिता’ ही पहली पहचान है।

पढ़िए :- पिता पर कविता – बंजर है सपनों की धरती

6.
जलती धूप में वो आरामदायक छाँव है
मेलों में कंधे पर लेकर चलने वाला पाँव है,
मिलती है जिंदगी में हर ख़ुशी उसके होने से
कभी भी उल्टा नहीं पड़ता ‘पिता’ वो दांव है।

7.
उसकी रातें भी जग कर कट जाती हैं
परिवार के सपनों के लिए,
कितना भी हो ‘पिता’ मजबूर ही सही
पर हमारी जिंदगी में इक ठाठ लिए रहता है।

8.
न रात दिखाई देती है
न दिन दिखाई देते हैं,
‘पिता’ को तो बस परिवार के
हालात दिखाई देते हैं।

9.
कमर झुक जाती है बुढापे में उसकी
सारी जवानी जिम्मेवारियों का बोझ ढोकर,
खुशियों की ईमारत खड़ी कर देता है ‘पिता’
अपने लिए बुने हुए सपनों को खो कर।

10.
परिवार के चेहरे पे ये जो मुस्कान हंसती है,
‘पिता’ ही है जिसमें सबकी जान बस्ती है।

11.
बिता देता है एक उम्र
औलाद की हर आरजू पूरी करने में,
उसी ‘पिता’ के कई सपने
बुढापे में लावारिस हो जाते हैं।

12.
सख्त सी आवाज में कहीं प्यार छिपा सा रहता है
उसकी रगों में हिम्मत का एक दरिया सा बहता है,
कितनी भी परेशानियां और मुसीबतें पड़ती हों उस पर
हंसा कर झेल जाता है ‘पिता’ किसी से कुछ न कहता है।

13.
तोतली जुबान से निकला पहला शब्द
उसे सारे जहाँ की खुशियाँ दे जाता है,
बच्चों में ही उसे नजर आती है जिंदगी अपनी
उनके लिए तो ‘पिता’ अपनी जिंदगी दे जाता है।

14.
उसके लफ्जों को कभी गलत मत समझना
कि उसके हर अलफ़ाज़ में एक गहराई होती है,
न समझना उसकी हरकतों को अपने लिए परेशानियाँ तुम
तुम्हारे लिए तो ‘पिता’ ने दिल में एक दुनिया बसाई होती है।

15.
उसके हाथ की लकीरें बिगड़ गयी
अपने बच्चों की किस्मतें बनाते-बनाते,
उसी ‘पिता’ की आंखों में आज
कई आकाशों के तारे चमक रहे थे।

पिता पर अन्य रचनाए:

‘पिता पर शायरी’ शायरी संग्रह आपको कैसा लगा? अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। धन्यवाद।

आगे क्या है आपके लिए:

ये रचनाएँ भी पढ़े..



अच्छा लगा? तो क्यों ना लाइक और शेयर करे..!

Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उम्मीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

You may also like...

7 Responses

  1. Ramanuj sahu says:

    Bahut hi nice line pita hai to sansar hai Bali sb bekar hao

    • Sandeep Kumar Singh says:

      बिल्कुल सही बात कही रामानुज साहू जी आपने।

  2. Pooja says:

    Bhut accha likha hai vo logh Bhut kush nsib hote hai jenke pas father hote hai apne parents ke kadar kare

    • Sandeep Kumar Singh says:

      बिल्कुल सही बात कही आपने पूजा जी। किसी की कमी का एहसास हमें उसके न होने पर होता है। यही बात माता पिता के लिए भी लागू होती है।

  3. Vijay Kumar Prasad says:

    Very good poems

  4. Vijay Kumar Prasad says:

    Bahut rochak kahani hai pita ke liye

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *