पिता क्या है ? पिता के महत्व पर एक छोटी कविता | Hindi Poem On Father

हमारे जीवन में हम हर चीज की एक परिभाषा पढ़ते हैं।  ये परिभाषाएं तथ्य पर आधारित होती हैं। लेकिन भारत ऐसा देश है जहाँ कुछ परिभाषाएं भावनाओं से बन जाती हैं। जैसे प्यार की परिभाषा, भावनाओं की परिभाषा आदि। ऐसी ही एक परिभाषा मैंने भी “ पिता क्या है ?” के रूप में पिता पर कविता लिखने की कोशिश की है। पिता जो हमारी जिंदगी में वो महान शख्स है जो हमारे सपनों को पूरा करने के लिए अपनी सपनो की धरती बंजर ही छोड़ देता है। आइये पढ़ते हैं उसी पिता के बारे में :-

पिता क्या है?

पिता क्या है -Pita Par Kavita

पिता एक उम्मीद है, एक आस है
परिवार की हिम्मत और विश्वास है,
बाहर से सख्त अंदर से नर्म है
उसके दिल में दफन कई मर्म हैं।

पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है,
बचपन में खुश करने वाला खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।

पिता जिम्मेवारियों से लदी गाड़ी का सारथी है
सबको बराबर का हक़ दिलाता यही एक महारथी है,
सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है
इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है।

पिता ज़मीर है पिता जागीर है
जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है,
कहने को सब ऊपर वाला देता है ए संदीप
पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर है।

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54 लोगो के विचार

  1. रूद्र says:

    अतिसुन्दर

  2. RAM NARAYAN KASHYAP HARDOI UP says:

    I Love My Father

  3. Kuldeep says:

    My father is great????????

  4. पिता को समर्पित बहुत ही सुंदर और संजीदा किस्‍म की रचना प्रस्‍तुत की है आपने। इसके लिए आपका धन्‍यवाद।

    • Mr. Genius says:

      प्रशंसा के लिए आपका बहुत आभार जमशेद आज़मी जी। इसी तरह हमारे साथ बने रहिये। धन्यवाद।

  5. Anand Pal singh says:

    Very nice line for all children

  6. Jayanti Dewangan says:

    Thanks for these Dedicating song

  7. bittu kumar says:

    i like it bro

  8. Udham Singh Choudhary says:

    लाजबाव

  9. drverma says:

    पिता का महत्व बहुत ही अच्छा है मुझे भी इसका एहसास
    16 साल बाद हुआ जब मुझे दो जुड़वां लडकियां हुई आज मेरे एक संतुष्ट और खुश पिता हुं

    • सबसे पहले आपको बहुत-बहुत बधाई हो। पिता तो भगवान की एक ऐसी देन है जो हमारे जीवन में साथ रहकर हमे सद्मार्ग पर चलने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। आशा है आपको भी अपने पिता की महानता की अनुभूति हो गयी होगी। एक बार फिर से आपको बधाई व ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद।

  10. ikbal says:

    Very nice brother kya kavita likhi hain

  11. Shista says:

    Not so good you can write better

  12. लखन साहू says:

    बहुत सुन्दर !

  13. puneetchaubey says:

    aap ko thanks kehna chahta hu aapne muje mere papa ki yaad dila di….

  14. Raja patel says:

    Hum bahut khus nasibe hai ki humara pass papa ji hai

  15. ashish says:

    Very nice keep it up

  16. Laxman chouhan says:

    लाजवाब

  17. Shubham says:

    This poem is best.
    I love u papa

  18. sonika jain says:

    a very heart touching and commendable poem

  19. सुप्रिया says:

    पिता है तो हम है nice thought bhai

  20. सुप्रिया says:

    I love my Father

  21. surendra singh says:

    grate

  22. दिनेश सिदार says:

    पिता जी पर समर्पित बहुत ही सुन्दर पंक्तियां संजोए सर आपने
    सर्वप्रथम आपको बहुत बहुत धन्यवाद
    एवम काश कि ऐसा होता कि हर इंसान के मन मे पिता एवं माता के प्रति अपना फर्ज समझते हुए उनके प्रति इतनी आदर होती कि वृद्धा आश्रम की आवश्यकता ना होती

    • धन्यवाद दिनेश सिदार जी….. बिल्कुल सही बात कही आपने। लेकिन आज कल दोष माँ बाप का भी है जो अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं देते और उनके बीच दूरियां बढ़ जाती हैं।

  23. दिनेश सिदार says:

    माॅ एवम बाबूजी को सादर चरण वंदन

  24. Rajeeva Mohan Sharma says:

    Pita hai to bhagwan hai, pita nahi to bekar saara jahan hai, pita hamari aas hai, pita hai to humari San jarroraten khaas hai, Pita humare liye chnah hai,pita hai to aasan humari raah hai. mere pita aap jaha bhi ho sada swasth aur khush rahna, Him baccho par aasheervaad banaye rakhna. Galtiya Jo hui hohumsabko chama karna.Charno me pranam.

  25. Rajeeva Mohan Sharma says:

    Papa ji aap ko father's day par mery subhkamnayen. Varenya Bhatt, (Fareedabad)

  26. Rajeeva Mohan Sharma says:

    Sandeepji aapki kavita aapka maa baap ke prati kitna prem hai batati hai, aisi kavita tabhi banti hai.

    • धन्यवाद Rajeeva Mohan Sharma जी। ये माँ-बाप का प्यार ही है जो इस काबिल हुआ हूँ। एक बार फिर धन्यवाद।

  27. shivam Mishra says:

    Pita Parmeshwar hai

    पितृ देवो भव

  28. श्याम says:

    मैं आपसे वादा करता हु इस कविता का पाठ मेरे भजन संध्या के कार्यक्रम में जरूर करूँगा संदीप जी

    • श्याम जी ये तो आपने बहुत बड़ी बात कह दी। मैं इतना काबिल कहाँ की मेरी रचना किसी संध्या भजन का हिस्सा बने। आपको यह रचना अच्छी लगी वही मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। आपका अति धन्यवाद।
      इसी तरह हमारे साथ बने रहें।

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