पैसे पर कविता – पैसे की अजब कहानी | Paise Ki Ajab Kahani

आज की वास्तविकता को बताती ये पैसे पर कविता पढ़िए- पैसे की अजब कहानी।

पैसे पर कविता – पैसे की अजब कहानी

पैसे पर कविता

है लोभ बढ़ गया दुनिया में,
मैं जो बात करूं नादानी है।
पागल कर दे इंसान को जो,
पैसे की अजब कहानी है।

जहां रुतबा पहले ज्ञान का था,
प्रश्न आत्म सम्मान का था।
इज्जत इंसान की होती थी,
राज धर्म ईमान का था।
आज की पीढ़ी इन सब से,
एकदम ही अनजानी है।
पागल कर दे इंसान को जो,
पैसे की गजब कहानी है।

पैसा है तो सब कुछ है,
ये बात सिखाई जाती है।
दूर करे इंसान से जो,
वो किताब पढ़ाई जाती है।
है रिश्तेदारी पैसे की,
प्यार कहां रूहानी है।
पागल कर दे इंसान को जो,
पैसे की अजब कहानी है।

गरीब को मिलता न्याय कहां,
कानून तो अभी अंधा है।
पैसों से मिलता न्याय यहां,
जुर्म बन गया धंधा है।
अन्याय देख खामोश है सब,
खून बन गया पानी है।
पागल कर दे इंसान को जो,
पैसे की अजब कहानी है।

घर बड़े और दिल अब छोटे हैं,
इंसान नीयत के खोटे हैं।
भ्रष्ट हो रहे हैं अब सब,
नौकरियों के कोटे हैं।
हो कैसे उन्नति देश की,
सबके मन में बेइमानी है।
पागल कर दे इंसान को जो
पैसे की अजब कहानी है।

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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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4 लोगो के विचार

  1. Rameshwar Singh says:

    Yah poem vahut achchhi hai.
    I like this poem very much

  2. om says:

    बहुत खूब

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