नानी का घर :- नानी के घर बीती बचपन की यादों की हिंदी कविता

पहले जब संयुक्त परिवार मे ढेर सारे बच्चे होते थे तो रिश्ते भी कई तरह के होते थे जैसे – मामा, मौसी , आदि के बच्चो के साथ छुट्टियों मे नानी के घर मे जो धमा चौकड़ी मचती थी उसी का वर्णन इस कविता के माध्यम से करने की कोशिश की है। आज भी वो यादें बचपन की मानस पटल पर अंकित हैं और जब तब मन को गुदगुदाने चली आती हैं। पढ़िए ये कविता – नानी का घर ।

नानी का घर

नानी का घर

Image From :Garbagebin

कुछ कच्चे कुछ पक्के से
वो मकान वो गलियारे
जब हर साल छुट्टियां बिताने
जाते थे हम ननिहाल के चौबारे।
वो लकड़ी की बर्थ वाली रेल का सफर
फिर कुछ मीलों की दूरी
बस से और वो तांगे पर बैठ कर
घर पहुँचने तक का सफर ।
कितना उत्साह और जोश रहता था।
नानी के घर मे दो चार नही
पूरी बच्चों की रेलमपेल मची रहती थी।
इधर से हम उधर से बाकी के
मौसरे, ममेरे भाई – बहनों की फौज
धमा चौकड़ी की तो मत पूछो।

बड़े तो अपनी अलग गुफ्तगू मे लग जाते
और हम बच्चे अपनी – अपनी कारस्तानी दिखाने लग जाते ।
लुका – छिपी जब खेलते तो कोई छत पे
तो कोई कोठरी मे , कई तो अंदर वाले गोदाम
मे ही छुप जाते ।
जिसको कही जगह न मिलती
वो बिस्तरों के ढेर मे ही घुस जाता।
छत पर आँख मिचौली खेलते – खेलते कभी – कभी
छत की मुंडेर से नीचे गिरते – गिरते बच जाना
नानी की थैली से जब दस पैसा और कभी चवन्नी मिलते ही
गली मे कुल्फी वाले के पास दौड़ जाना।
चाट – पकौड़ी , टॉफी चूरन स्वाद ले ले कर खाना
वो रंग बिरंगे बर्फ के गोले खाकर
मुँह का लाल पीला हो जाना
फिर एक दूजे को देखकर खूब
हँस – हँस कर चिढ़ाना ।

कितना याद आता है वो सब !!
वो अचार के मर्तबानों से तरह – तरह
के खट्टे मिट्ठे आचारों को छुप- छुप कर
चट कर जाना।
छुप- छुप कर खाने का जो मजा तब था
वो अब कहाँ ?
सारा दिन खेल कूद कर थक हार कर
रात को जब छत पर गद्दे डालकर
खुले आसमान के नीचे सब का साथ- साथ
सो जाना ।
कितने भले लगते थे वो दिन !!
जो आज शायद 21वीं सदी की दौड़
मे कहीं खो से गये हैं !!!
अब तो न बच्चों के वो खेल हैं
न वो इंतजार !!
आँख खुलते ही तो जाने
कितने गैजेट्स उसको
लुभाने को रहते हैं तैयार ।।

मेरी कलम से ……

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लेखिका रेनू सिंघल के बारे में:

renu singhal

मेरा नाम रेनू सिंघल है । मैं लखनऊ मे रहती हूँ। मुझे बचपन से लिखने का शौक है । कहानियां ,कवितायें, लेख , शायरियाँ लिखती हूँ पर विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते इस शौक को आगे नही बढ़ा पायी।

अब मैं लेखन की दिशा मे कार्य करना चाहती हूँ । अपनी खुद की एक पहचान बनाना चाहती हूँ जो आप सबके के सहयोग से ही संभव है। जीवन के प्रति सकारात्मक सोच और स्पष्ट नज़रिया रखते हुए अपनी कलम के जादू से लोगो के दिलों मे जगह बनाना मेरी प्राथमिकता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी का सहयोग अवश्य मिलेगा। धन्यवाद।

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