दीपावली पर प्रेरणात्मक उद्धरण – प्रेरक विचार दिवाली के दीपों के साथ

दिवाली दीपों का त्यौहार है। राम जी के अयोध्या वापसी के उपलक्ष्य में यह त्यौहार पूरे भारतवर्ष में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। दीपावली को दीपों का त्यौहार भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन जब राम जी अयोध्या वापस आये थे तो अयोध्यावासियों ने दिए जलाकर उन का स्वागत किया था। राम जी का रावण को माररकर अयोध्या वापस आना अपने आप में एक कीर्तिमान था। जो हर इन्सान को सन्देश देता है कि परेशानियाँ कभी बता कर नहीं आती और संसार उन्हीं की पूजा करता है जो विश्व के सामने सफलता के नए कीर्तिमान रचता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दिवाली के त्यौहार पर हम आपके लिए लाये हैं दीपावली पर प्रेरणात्मक उद्धरण :-

दीपावली पर प्रेरणात्मक उद्धरण

दीपावली पर प्रेरणात्मक उद्धरण


1. दिवाली इस बात का प्रतीक है कि अँधेरा कितना भी घना हो महत्त्व प्रकाश का ही होता है।


2. जिस तरह छोटे-छोटे दीये मिल कर अमावस की रात को रोशन कर देते हैं। उसी तरह छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़े-बड़े लक्ष्य प्राप्त होते हैं।


3. विश्व में सबसे प्रकाशमय वस्तु ज्ञान है। जिससे हमें प्रकाश का महत्व ज्ञात होता है और मन के सारे अन्धकार दूर हो जाते हैं। इसलिए इस दिवाली ज्ञान का प्रकाश फ़ैलाने का संकल्प लें।


4. श्री राम जी की अयोध्या वापसी इस बात का प्रमाण है कि सच्चाई और अच्छाई सिर्फ झूठ और बुराई ही नहीं बल्कि अमावस के अँधेरे को भी दूर कर देती हैं।


5. शुरुआत छोटी-बड़ी नहीं होती, अंत होता है। अपने कर्तव्य के प्रति दृढ़ रहें। सफलता अवश्य प्राप्त होगी। कष्ट तो राम जी को भी झेलने पड़े थे।


6. सबके साथ एक जैसा व्यवहार करें। दिया गरीब के घर जले या अमीर के घर जले। प्रकाश एक जैसा ही करता है।


7. कभी भी किसी कि कमजोरी का मजाक नहीं उड़ना चाहिए। हर इन्सान में कोई न कोई कमजोरी जरूर होती है। दिया चाहे जितनी भी रौशनी करता हो। उसके नीचे सदा अँधेरा ही होता है।


8. कभी भी स्वयं पर अभिमान नहीं करना चाहिए। अंत में हर दीया बुझकर अन्धकार का ही हिस्सा बन जाता है।


9. अँधेरा मुसीबत नहीं एक मौका है। खुद को एक दिये की तरह जला कर अपने हुनर से अपनी जिंदगी रौशन करने का।


10. अपना जीवन दूसरों की सेवा में लगाइए। एक दीया भी खुद जल कर दूसरों को ही प्रकाश देता है।


11. दिवाली मात्र एक त्यौहार नहीं अँधेरे को चुनौती है। अपने मन को ज्ञान रुपी दीप से प्रकाशित करें। जीवन से परेशानियों का अन्धकार समाप्त हो जायेगा।


12. दिया एक बार जलाये जाने पर स्वयं जलता रहता है। इसी तरह आगे बढ़ने के लिए बस एक शुरुआत की जरूरत होती है मंजिल तक इंसान अपने आप पहुँच जाता है।


13. दीपों की माला एकता की बहुत अच्छी उदाहरण है। जो एक साथ मिल कर पूरे गाँव को अन्धकार मुक्त कर देते हैं।


14. अँधेरे में रास्ता दिखाने और मंजिल पर पहुँचाने के लिए एक ही दीया बहुत है। इसलिए कभी ये न सोचें कि आप अकेले कुछ नहीं कर सकते। कई महान पुरुषों ने अकेले ही सफ़र शुरू किया था।


15. एक बंद कमरे में जलते दिए का प्रकाश बहार निकलने के लिए कहीं न कहीं से रास्ता ढूंढ ही लेता है। बस ऐसी ही नजर और शिद्दत आपको जिंदगी की परेशानियों से बाहर निकाल सकती है।


16. किसी हार चुके इन्सान की अँधेरी जिंदगी को आप हौसले के एक दिये से रोशन कर सकते हैं।


17. दीये सिर्फ दिवाली पर ही नहीं प्रकाश नहीं देते बस इनका महत्त्व दिवाली पर कुछ ज्यादा होता है। दीये की तरह जलते रहिये आपकी दिवाली भी किसी दिन आएगी जब आप का महत्व भी समझा जाएगा।


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धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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