प्रेरक हिंदी कविता – मुसीबतें | Motivational Hindi Poem – Museebaten

मुसीबतें किसके जीवन में नही आती मुसीबतें हमारे जीवन का एक अभिन्न भाग है। कुछ लोग मुसीबतों का सामना नही कर पाते। कुछ लोग सामना करते है, और थक कर बीच में ही हार मान लेते है। जबकि कुछ लोग कभी हार नही मानते और मुसीबतों से तब तक लड़ते रहते है, जबतक वो जीत ना जाये। बस उन्ही लोगो से प्रेरित ये कविता है, जिसमे हमें मुसीबतों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। पढ़े प्रेरक हिंदी कविता – मुसीबतें ।


प्रेरक हिंदी कविता – मुसीबतें

प्रेरक हिंदी कविता - मुसीबतें

चट्टान सी खड़ी रही मुसीबतें,
मैं सागर की लहरें बन टकराता रहा।
कठोर छाती ढकेल देती वापस मुझे,
बटोर हिम्मत मैं बार-बार वापिस आता रहा।

धूल धुल गई जब सच के आइने से,
मेरी कोशिशों का असर रंग दिखाता रहा।
टूट रहा था वो पत्थर भी धीरे-धीरे,
साध निशाना मैं वार हर बार बरसाता रहा।

बिखर रहा था वो इस चोट से ज़र्रा-ज़र्रा,
देख साहिल मैं उस पार रास्ता बनाता रहा।
कट गया पत्थर मेरी रुकावटों का,
धुन उमंग के गीतों की मैं गाता रहा।
चट्टान सी खड़ी रही मुसीबतें
मैं सागर की लहरें बन टकराता रहा।


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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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