जिंदगी पर कविता – जिंदगी समंदर | Zindagi Par Kavita

जिंदगी समंदर के सामान है जो हमें डुबो के तैरना अर्थात तकलीफ देके जीना सीखती है। उसी पे ये जिंदगी पर कविता पढ़े –

जिंदगी समंदर – जिंदगी पर कविता

जिंदगी पर कविता

न सीखा हुनर मैंने तैरने का,
डूबा दिया जो समुंदर ने तो,
बेवजह हमने बेवफा  कह दिया।

उम्मीद लहरों से थी कि
साहिल दिला दे मुझे,
ऐसा फँसा था मझधार  में मैं
कि मुझे किनारे ना दिखा।

मंडराती रही कश्तियां चारों ओर
मेरे अपनों की तरह,
हालात मेरे उनको मेरी अदाकारी के नमूने लगे।
छोड़ चुका था हिम्मत रात अंधेरी काली में,
दिखी जो एक किरन उजाले  की तो सहारा सा मिला ।

कोशिशें जारी की मैंने
नए दिन को निकलते देख,
हौसला देख मौजों ने भी
साथ दिया मेरा।
किसी तरह पहुंचा जो किनारे पर,
तो किश्ती सवारों से शाबाशी का इनाम मिला।

शुक्रगुजार हूं उस समुंदर का
जिसका नाम जिंदगी है,
जीने का सबक हमको बतौर इनाम मिला।


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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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