माँ पर कविता – माँ का प्यार | मातृ दिवस पर विशेष कविता

मातृ दिवस पर आज मैंने माँ के लिए कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं। हमारी ओर से इस संसार की हर माँ को हम ये कविता समर्पित करते हैं। पढ़िए माँ पर कविता – माँ का प्यार।

मेरी माँ पर कविता – माँ का प्यार

माँ पर कविता

इक थपकी नींद ले आती है वो जब भी लोरी गाती है,
चेहरे के भाव को देख के ही हर बात समझ वो जाती है।
मेरी नादानी, मेरी शैतानी, मेरी तोतली बातें बचकानी
देख के मेरे बचपन में वो अक्सर ही मुस्कुराती है,
बिगड़े जरा सी हालत तो चिंता में वो पड़ जाती है,
देखभाल में मेरी अकसर सारी रात जाग कर बिताती है,
इक थपकी नींद ले आती है वो जब भी लोरी गाती है,
चेहरे के भाव को देख के ही हर बात समझ वो जाती है।

खुद भूखी रह जाती है पर भूखा न मुझे सुलाती है,
वो खाली पेट बसर कर मुझको भर पेट खिलाती है,
हैरान हूँ मैं वो पढ़ी नहीं है अक्षरों से कभी वो लड़ी नहीं है,
न जाने कैसा जादू है वो मेरी हर धड़कन पढ़ जाती है,
इक थपकी नींद ले आती है वो जब भी लोरी गाती है,
चेहरे के भाव को देख के ही हर बात समझ वो जाती है।

वो तपती धूप में छाया है वो प्यार की पावन माया है,
माँ की महिमा को तो खुद भगवान ने भी गाया है,
उसके आशीर्वाद से ही हर दुःख तकलीफ मिट जाती है,
“माँ” की मौजूदगी से ही तो घर में खुशियां आती हैं
इक थपकी नींद ले आती है वो जब भी लोरी गाती है,
चेहरे के भाव को देख के ही हर बात समझ वो जाती है।

माँ की याद में कविता – तू लौट आ माँ | हिंदी कविता माँ के लिए


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धन्यवाद। पढ़े ये बेहतरीन कविताएँ-

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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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