माँ की याद शायरी :- माँ की कमी का एहसास कराती शायरियां और स्टेटस

इस ब्लॉग पर आप अभी तक माँ की याद में ये रचनाएँ पढ़ चुके हैं :- माँ की अहमियत कविता, न जाने तू कहाँ चली गयी माँ और तू लौट आ माँ कविता। लेकिन अब तक इस पर कोई शायरी संग्रह न था। तो इसी क्रम में हम आपके लिए लेकर आये माँ की याद शायरी :-

माँ की याद शायरी

माँ की याद शायरी

1.

जब भी कभी जिन्दगी में खुशियों की बात आती है,
भर जाती हैं मेरी आँखें और बस माँ याद आती है।

2.

अपनी ख्वाहिशों का क़त्ल कर
वो हमेशा हमारे सपनों के लिए जीती थीं,
बस कुछ इसी तरह
हमारी जिन्दगी मौज में बीती थी।

3.

सहूलतों का लालच ले आया हमें माँ से दूर,
और माँ के बिना हर सहूलियत बेकार लगती है।

4.

तेरे साथ गुजरे लम्हे ही तो
अब मेरे जीने का सहारा है,
तुझे क्या बताएं माँ
तेरी यादों का हमें हर हिस्सा प्यारा है।

5.

तेरी यादों में ही मेरी हर रात कट जाती है
न आँसू रुकते हैं और न तू आती है,
कुछ गुनाह किया हो तो उसकी सजा दे मुझे
यूँ दूर जाकर मुझे अब क्यों रुलाती है?

6.

माँ जब से मेरी तेरे संग ये दूरी हो गयी
जिन्दगी जीना जैसे एक मजबूरी हो गयी,
अब वो सुकून कहाँ मिलता है मुझे इस ज़माने में
आज पूरी तो हो गयी हर ख्वाहिश लेकिन
तेरे बिना जिन्दगी अधूरी हो गयी।

7.

तेरी सुनाई लोरियां आज भी कानों में गूंजती हैं
घर की हर चीज में ये आँखें बस तुझे ही ढूंढती हैं
कहाँ गयी है तू जो तेरी कोई खोज खबर नहीं मिलती
जहन में तो आज बस तेरी यादें ही घूमती हैं।

8.

तेरी कमी इस जिन्दगी में मुझे बहुत सताती है,
हो सके तो लौट आ माँ तेरी याद बहुत आती है।

9.

तेरी याद में सब कुछ भूल गया
कि ये दुनिया कितनी प्यारी थी,
सारा ही जहाँ ये अपना था
जब पास हमारे माँ हमारी थीं।

10.

ये उसकी ही परवरिश का असर है
जो आज मैं इस मुकाम पर हूँ,
सारा जीवन लगा दिया था उसने
मुझे इस मुकाम तक पहुँचाने को।

पढ़िए :- कविता ‘माँ के क़दमों में सारा जहान है’

11.

मेरी बातों को वो कहाँ दिल पे लेती थी,
खता मेरी बस पल भर में भुला देती थी।

12.

मेरे ख्वाबों का दरिया जैसे सूख सा गया है
तेरे जाने के बाद
तू पास थी तो खुशियों के सैलाब भा करते थे।

13.

हाँ, चिढ़ता था तेरी बातों से
जब डांट के दूध पिलाती थी,
पर अब याद बहुत करता हूँ
कि तू कितना लाड लडाती थी।

14.

न लोरी सुनाता है कोई
न प्यार से खाना खिलाता है,
तेरे जाने के बाद ओ माँ
हर लम्हा मुझे रुलाता है।

15.

दिल में दर्द सा होता है
आँखें ये भर-भर जाती हैं,
माँ तेरे साथ बिताये पलों की
यादें जब मुड़-मुड़ आती हैं।

16.

कितने भी बुरे हालत रहें न भूखा हमें सुलाती थी,
वो प्यारी हमारी प्यारी माँ अक्सर खुद भूखी सो जाती थी।

17.

वक़्त बीत गया है और बीत गयी हैं सारी बातें,
तेरे जाने के बाद कुछ बचा है तो
खामोश दीवारें और उदास रातें।

18.

मेरे बचपन में मेरी सारी जिम्मेवारियां
उसने पूरी शिद्दत से निभाई थीं,
कैसे हो सकती थी किस्मत में परेशानियाँ मेरी
मेरे हाथों की लकीरें मेरी माँ ने बनायीं थीं।

19.

खामोश रहने पर भी उसे हो जाती थी फ़िक्र मेरी,
अब तो आँसू बहाने पर भी कोई जिक्र नहीं होता।

20.

न दिल से तुम्हारी जुदाई का दर्द जाता है
न ही ये आँखें अब सोती हैं,
अब समझ में आता है उनका दर्द
जिनकी इस दुनिया में माँ नहीं होती है।

पढ़िए :- माँ की महिमा का बखान करते दोहे

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धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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3 Responses

  1. अनु कहते हैं:

    बहुत ही अच्छा लगा ये लाइन तो दिल को छू गयी
    न लोरी सुनाता है कोई
    न प्यार से खाना खिलाता है,
    तेरे जाने के बाद ओ माँ
    हर लम्हा मुझे रुलाता है
    ???

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