जादुई पत्थर – सफलता का रहस्य बताती लघु कथा | Hindi Short Story

ये कहानी है एक ऐसे जादुई पत्थर की जिसने रोहित का जीवन बदल दिया। पत्थर? वो भी जादुई? क्या हुआ? विश्वास नहीं हुआ? जी हाँ, जादुई पत्थर । आइये जानतेहैं कैसे रोहित के जीवन में एक जादुई पत्थर कि वजह से बदलाव आया।

जादुई पत्थर

रोहित पढ़ने में बिलकुल भी मन नहीं लगाता था या फिर यूँ कहा जा सकता है कि उसने अपने मन में पहले से ही बैठा रखा था कि वह पढ़ नहीं सकता। पढ़ाई उसके बस की नहीं है। उसके घर वाले इस बात को लेकर परेशान थे कि उसे कैसे समझाया जाए। उसके परिवार के हर सदस्य ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन सब व्यर्थ।

एक दिन उन्होंने ने सुना कि उनके शहर में कोई पहुंचे हुए संत महात्मा आये हैं। ये सुन कर रोहित के माता-पिता ने सोचा कि वो रहित के लिए उन संत -महात्मा से मिलेंगे। हो सकता है कोई चमत्कार हो जाए। छुट्टी वाले दिन उनके पास जाने का निर्णय हुआ।

रविवार का दिन था, रोहित और उसके मात-पिता सुबह जल्दी तैयार हो गए जाने के लिए। क्योंकि उन्होंने ने सुना था कि वहां पर बहुत ज्यादा लोग आते हैं और मिलने में काफी देर लग जाती है। इसलिए वो लोग जल्दी ही घर से निकल गए।

जहाँ वो महात्मा ठहरे हुए थे वो जगह रोहित के घर से थोड़ी ही दूरी पर था। इसलिए वो लोग जल्दी ही पहुँच गए और सुबह जल्दी पहुँचने के कारण उनकी मुलाकात भी जल्दी हो गयी। मुलाकात होते ही रोहित के माता-पिता ने अपनी परेशानी उनके सामने रख दी,

” बाबा जी, ये हमारा बेटा रोहित है। पड़ने में बिलकुल मन नहीं लगाता। हमने अपनी तरफ से हर कोशिश कर के देख ली परन्तु कोई भी तरीका कारगार न हुआ।”

“ये लो बेटा ये एक जादुई पत्थर है। इसे सदा अपने पास रखना। इससे तुम्हें पढ़ाई करते समय एक अद्भुत शक्ति मिलेगी। जिससे तुम्हें सब कुछ आसानी से याद हो जायेगा। लेकिन एक बाद याद रखना किसी को भी इस जादुई पत्थर के बारे में पता नहीं लगना चाहिए नहीं तो इसकी जादुई शक्तियां ख़त्म हो जाएंगी।”

एक छोटा सा पत्थर देते हुए उन महात्मा ने कहा।

इसके बाद रोहित और उसके माता-पिता वापस घर आ गए। उस दिन के बाद रोहित हर पल उस पत्थर को अपने पास रखें लगा। पढ़ते समय, खेलते समय यहाँ तक कि सोते समय भी वो पत्थर पाने पास ही रखता था।

रोहित की पढ़ाई में अब कुछ सुधार हो रहा था। उसका मन पढ़ाई में लगने लगा था। ये परिवर्तन देख कर सब लोग हैरान थे। लेकिन इसका राज सिर्फ रोहित और उसके घर वालों को ही इस राज के बारे में पता था।

रोहित की पढ़ाई में इस कदर सुधार हुआ कि उसने अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। रोहित और उसके परिवार की ख़ुशी का ठिकाना न था। उन्होंने उन महात्मा का धन्यवाद करने के लिए उनसे मिलने की योजना बनायी।

अगले ही दिन वो लोग उन महात्मा के पास पहुंचे। रोहित के पिता ने कहा,

“बाबा आपके दिए गए जादुई पत्थर की करामात के कारण आज रोहित पढ़ाई में मन लगाने लगा है। इसी के कारण ही उसने अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।”

“कौन सा जादुई पत्थर?”

बाबा ने शांत भाव से कहा। तभी रोहित की माँ बोली,

“वही जादुई पत्थर बाबा जो आपने रोहित की पढ़ाई में सुधार के लिए दिया था।”

“हा हा हा हा हा हा…”

बाबा हँसे और बोले,

“वो कोई जादुई पत्थर नहीं था वह तो एक साधारण सा पत्थर था।”

“क्या?”

रोहित के माता-पिता दोनों हैरान होते हुए बोले,
“हाँ, वह एक साधारण पत्थर था। असल में वह पत्थर नहीं एक विश्वास था। जो मैंने रोहित के लिए दिया था। उसने अपने मन में यह बात बैठा रखी थी कि वह पढ़ नहीं सकता, उसे कुछ याद नहीं होता। यही कारण था कि वह पढ़ नहीं पाता था। उसने अपने मन में ययः विश्वास पक्का कर रखा था। इस विश्वास को तोड़कर उसके मन में नया विश्वास बसाना था। जो काम इस पत्थर ने किया।”

“क्या मतलब?”

“मतलब ये कि ये पत्थर प्राप्त करते ही रोहित कि मानसिक स्थिति बदल गयी। उसके मन में यह विश्वास अपनी जगह कर गया कि वह अब पढ़ सकता है और उसे सब याद भी हो जायेगा। जैसे ही उसके मन ने यह सब स्वीकार किया। वैसे ही उसकी पढाई में सुधर आरंभ हो गया।”

“मतलब वो पत्थर बेकार था।”

अब बात रोहित के माता-पिता के समझ में आ गयी थी। उन्होंने महात्मा का धन्यवाद किया और घर कि और चल दिए। हाँ, उस पत्थर को उन्होंने रस्ते में फैंक दिया।

दोस्तों ऐसी ही हालत हमारी भी है। हम में से ज्यादातर लोग अपने जीवकं में बस इसलिए आगे नहीं बढ़ पाते क्यूंकि हमने अपने मन को यह समझाया हुआ है कि हम आगे नहीं बढ़ सकते, हम इस समस्या का हल नहीं निकल सकते, जैसा भगवन चाहेंगे वैसा ही होगा आदि।

ऐसा कुछ नहीं होता। हम वैसा ही जीवन येते हैं जैसा हम जीना चाहते हैं। हमारे जीवन को नियंत्रित करने के लिए कोई दूसरा यन्त्र नहीं बना है। यदि हम अपने जीवन को बेहतर देखना चाहते हैं तो उसके लिए हमें ही कुछ करना होगा। उसके लिए सबसे पहले हमें अपने मन को यह समझाना होगा कि हम कुछ भी कर सकते हैं और हमारे जीवन में होने वाली चीजों को हम नियंत्रित कर सकते हैं। तभी हम अपने जीवन को सुखदायी बना पाएँगे। और हाँ जादू किसी पत्थर में नहीं, हमारे मन में होता है।

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Sandeep Kumar Singh

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