देश का भविष्य – A Story Which Tells Condition Of Country

आज बहुत अजीब वाकया हो गया मेरे साथ। सच में कुछ पलों के लिए मैं तो स्तब्ध रह गया। आज आधुनिकता के दौर में सब हाई-फाई  हो चुके हैं। किसी को भी मात्र उसका चेहरा देख कर उसके वजूद के बारे में नहीं जान सकते।  गलतफहमियां अक्सर हो सकती हैं। इसी का शिकार आज मैं भी हो गया। जो देश का भविष्य बताने के लिए काफी है।

देश का भविष्य

देश का भविष्य

बात आज सुबह की है। मौसम सर्द था। तैयार होकर घर से अपनी कार में निकला। आस पास कुछ दिख नहीं रहा था। बहुत धीमी गति से मैं कार को एक सीधी काली पट्टी पर लिए चला जा रहा था। मेरे लिए वो सड़क काली पट्टी ही एकमात्र सहारा थी अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए। अचानक रास्ते में एक चौराहा आया। मैं असमंजस में पड़ गया कि आगे का रास्ता किधर जाता होगा।

अभी सोच ही रहा था कि एक आदमी दिखाई दिया। जो देखने में दुबला-पतला और ठंड के कहर से कांपता हुआ आया और बोला,” साहब बहुत भूखा हूँ कुछ दे दो साहब।” उसकी हालत और हाव-भाव देख कर न चाहते हुए भी हाथ जेब में पड़े 10 रुपये के नोट पर जा पहुँचा और कार की खिड़की का शीशा नीचे किया और उस व्यक्ति के हवाले कर दिया।

वो कुछ बोलता उस से पहले ही मैंने पूछ लिया,”ये सरकारी हस्पताल का रास्ता कौन सा है?”
” डू यू हैव अ फोन?” ये शब्द उस के मुँह से सुन एक पल के लिए मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई अरे कहावत है, मुझे पता है मैं कार में हूँ।

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे धुंध के साए में कहीं किसी और देश में आ गया हूँ।
“सर कहाँ खो गए?” उसके प्रश्न से मैं होश में आया और मैंने कहा,”तुम अँग्रेजी बोलते हो और भीख माँगते हो, तुम्हें शर्म नहीं आती?”
वो बोला,” सर मैं उन 21% भारतीयों भिखारियों में से एक हूँ जो बारहवीं पास हूँ। और ये जिस दिन कोई नौकरी मिली मैं ये काम छोड़ दूँगा। “
“तुम कहीं नौकरी के लिए आवेदन क्यों नहीं देते?” मैंने पूछा।
“साहब पैसे होंगे तभी तो काम होगा वरना हम भीख ही क्यों मांगते। चलो छोड़ो आप के पास फोन तो होगी ही।”
“हां, है तो?”
“उसमें इंटरनेट चलता है या…..?” कहकर वह मुस्कुरा दिया।
मैंने कहा “हां चलता है फेसबुक चलानी है क्या?”
“नहीं साहब गूगल मैप निकालो और जहां जाना है जाओ टेंशन मत लो मौसम ही खराब है नेटवर्क नहीं।”
इतना कहकर वह चला गया और मुझे कई सवालों से बीच छोड़ दिया।

क्या यही है हमारा भारत ? जहां एक पढ़ा-लिखा ही युवा भीख मांग कर गुजारा करता है। मात्र कुछ रुपए के अभाव के कारण एक इंटरव्यू या किसी नौकरी के लिए परीक्षा देने में असमर्थ है। उसके द्वारा मुझे रास्ता बताए जाने का तरीका मेरे दिमाग में बार बार घूम रहा था। उसने मुझे रास्ता ना बताकर भी रास्ता बता दिया था और वर्तमान में मेरी सहायता कर देश का भविष्य धुंध में ना जाने कहां गायब हो गया।


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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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