हिंदी शायरी संग्रह by संदीप कुमार सिंह – 5

पढ़िए हिंदी शायरी संग्रह – 5

शायरी संग्रह – 5

शायरी

1. अंदाज

अंदाज उसका भी बहुत लाजवाब था,
होंठों पर चुप्पी और आँखों में दर्द बेहिसाब था,
रुक गयी थी धड़कनें दिल की मगर
ऐ दोस्तों
चेहरे पर अब भी शर्म-ओ-हया का हिजाब था।

2. बेवफाई

तेरी अदाओं में ही बेवफाई थी इस से वाकिफ  था मैं,
मगर अफ़सोस दिल तेरी बेवफाई का भी दीवाना हुआ।

3. मोहब्बत

सुना है बर्बाद कर देती है मोहब्बत ज़माने में दिल लगाने वालों को,
चैन कहाँ मिलता है फिर आशियाने में दिलवालों को,
खुली फ़िज़ाओं का अहसास होता है महबूब की बाहों में,
टूटी झोंपड़ी भी जन्नत लगती है फिर इश्कवालों को।

4. अफवाह

जिंदगी से थक हार कर जब हमें गहरी नींद आई थी,
मेरे अपनों ने ही मेरी मौत की अफवाह उड़ाई थी।

5. शहंशाह

मुसीबत जिंदगी में और हालातों में लाचारी है,
मुकद्दर चल जाएगा इक दिन की जद्दोजहद जारी है,
उस दिन सारे जहान में हमारी बात होगी,
हम होंगे शहंशाह और पैरों में कायनात होगी।

6. तलाश

तनहा सा महसूस होता है इस दुनिया में आज कल,
इसीलिए एक दोस्त की तलाश में घूमता हूँ ,
लेकिन
न हिन्दू ढूंढता हूँ,न मुसलमान ढूंढता हूँ,
इंसान की औलाद हूँ, इंसान ढूंढता हूँ।

7. बेशर्म जिंदगी

मेरी बर्बादी के लिए जाल ये हर बार बुनती है,
बेशर्म जिंदगी चुनौती के लिए मुझे ही हर बार चुनती है।

8. किस्मत

मैंने देखा है सपनों को सच होते हुए कुछ पाकर बहुत कुछ खोते हुए,
रातों को जागकर बदली हैं किस्मतें  कौन पहुंचा है आसमानों पर सोते हुए।

9. नजरिया

किसी के साथ जो हुआ वो मज़ाक लगता है
खुद पर आ जाए तो इत्तेफ़ाक़ लगता है,
कदर होती है वक़्त सही चलता है तो
वरना ये शरीर भी औरों को खाक लगता है।

10. दुनिया

मदद करने को कोई तैयार नहीं
हर जगह ठगने को चोर और बदमाश बैठे हैं,
उम्मीद क्या करें दुनिया वालों से यहां
हमारे लिए ये बन कर जिन्दा लाश बैठे हैं।

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Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

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