शरद की खुबसूरत सुबह | सुबह की खूबसूरती पर एक कविता

दिन की सुरुवात सुबह से होती है। और सबह की खूबसूरती तो आप सबको पता ही है। अगर सुबह शरद ऋतू की हो तब तो हमारा मन खुबसूरत सुबह को देख के पुलकित होने लगता है। ऐसे ही शरद की खुबसूरत सुबह की खूबसूरती पे चंद लाइने प्रस्तुत है। पढ़िए और कैसी लगी हमें कमेंट में बताईये।


शरद की खुबसूरत सुबह

शरद की खुबसूरत सुबह

कोहरे का घूघंट कर सुबह
निकली सूरज की लाली में,
ओस की बूँदें लगे हैं मोती
खेतों की हरियाली में।
शीत लहर का मौसम ऐसा
रंग बिरंगे बागों में,
मंद-मंद मुस्काऐ कुसुम
पौधों की पतली डाली में।

खग नभ में जो उड़ते जाएँ
गीत सुहाने गाते हैं,
करे पुकार ह्रदय ये मेरा
मिल जाऊँ चाल मतवाली में।
आरती है आजान कहीं
स्वर पड़ते मधुर कानों में,
सिखा रहा हो दूर अंधेरा
जग की इस उजियाली  में।

कष्ट हो या हो संशय कोई
या भटके मन कहीं राहों में,
प्रसन्नता से प्रयास तू करना
हर हल है सोच निराली में।
कोहरे का घूघंट कर सुबह
निकली सूरज की लाली में।


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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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