Funny Hindi Report ‘गधो का आन्दोलन’

Funny Hindi Report ‘गधो का आन्दोलन’

आज सुबह सुबह उठा तो दिमाग में ख्याल आया कि चलो टी.वी.चला कर देखते हैं। आज क्या नया चल रहा है। जैसे ही मैंने टी.वी. ऑन किया, कुछ ऐसे पाया जो दिमाग घुमा देने वाला था। कई दिनों से देश में असहिष्णुता के विरोध में आंदोलन हो रहे थे। जिस आंदोलन में एक नया मोड़ आ गया था।
Funny Hindi Report 'गधो का आन्दोलन'

देशभर के सारे गधे एक जगह इकट्ठे होकर असहिष्णुता के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। पहली बार में तो मुझे लगा कि मैं कोई सपना देख रहा हूं। मैंने पास ही पड़ी कलम को उठा कर हाथ पर चुभाया। दर्द के मारे चीख निकल गई। तब जाकर एहसास हुआ कि मैं सच में जाग रहा हूं।

पर यह गधों को क्या हो गया? इन सबके बीच एक रिपोर्टर गधों के अध्यक्ष के पास पहुंचा और आदत अनुसार प्रश्न पूछ लिया :-

रिपोर्टर :- आप इन  सब गधों के अध्यक्ष हैं। हम जानना चाहेंगे कि आपको यह आंदोलन करने की क्या सूझी ?

गधों का अध्यक्ष :- ढेंचू ढेंचू…. जब देश  में रहने वाले ही देश के खिलाफ खड़े हो सकते हैं, तो हम अपने हक और अपना  अस्तित्व  बचाने के लिए आंदोलन क्यों नहीं कर सकते ?

रिपोर्टर :- आप का अस्तित्व किस प्रकार खतरे में है ?

गधों का अध्यक्ष :- आज स्थिति कुछ ऐसी बन गई है कि इंसान की कमियों को छुपाने के लिए हमारी जाति को बदनाम किया जाता है। ढेंचू ढेंचू….. यदि किसी का बच्चा नालायक हो तो उसे गधा कह देते हैं। किसी की पत्नी ज्यादा काम करवाए तो वह कहता है,”मैं गधा नहीं हूं।” और तो और यदि विद्यालय में कोई विद्यार्थी नालायक हो अध्यापक कह देता है कि तुम गधे के बच्चे हो। ढेंचू ढेंचू…..

रिपोटर(हंसी रोकते हुए) :- परंतु इस में आपके हक की क्या बात है?

गधों का अध्यक्ष :- आज कुछ इंसानो के यहां ऐतराज है कि वह देश में सुरक्षित नहीं हैं।  देश में असहिष्णुता बढ़ चुकी है। ढेंचू ढेंचू…..जबकि वह देश के नामी गिरामी व्यक्ति हैं। फिर हमारे तो नाम का प्रयोग बेधड़क किया जा रहा है। अगर कल को इंसानों ने खुद को गधा ही घोषित कर दिया तो हमारे अस्तित्व का क्या होगा ?? ढेंचू ढेंचू….

रिपोर्टर :-  तो अब आप सबकी मांगें क्या हैं ?

गधों का अध्यक्ष :- ढेंचू ढेंचू…. हम चाहते हैं कि हमारे नाम का प्रयोग इंसानो के लिए वर्जित हो। यह सिर्फ हमारा ही नाम है और हमारे लिए ही प्रयोग हो। ढेंचू ढेंचू …… इस देश में इंसानों को अपने प्रति असहिष्णुता तो दिख रही है। पर हम गधों का क्या? जो आम जनता का बोझ ढो रहे हैं। अपने फायदे के लिए यह जरूरत से ज्यादा बोज लाद देते हैं और हमें चुपचाप सहना पड़ता है। क्या ये असहिष्णुता नहीं है? हमें अपने अधिकार और सुरक्षा चाहिए।

इतना सुनने के बाद कुछ पल के लिए मैं सन्नाटे में खड़ा रहा और सोचने लगा अगर आज गधों ने आंदोलन कर दिया है तो कल को कहीं वफादार कुत्ते भी बगावत ना कर दें। यही सोचते हुए  मैंने टी.वी. बंद किया और नियमित कार्यों में लग गया।

Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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2 लोगो के विचार

  1. Ajay says:

    Apki Blog Bahot Achi Lagi

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