दो गुब्बारे :- कहानी इंसान की मानसिकता की

यह कहानी है हम जैसे इंसानों की मानसिकता की। किस तरह हम साधारण जीवन जीते हुए ही अपना जीवन व्यतीत कर देते हैं। जबकि हमे यह मनुष्य जीवन अपनी क्षमताओं का प्रयोग करने के लिए मिला है। इसका साईं तरह से उपयोग न करने पर हमें कष्ट भोगने पड़ते हैं और तब हम अपनी किस्मत या भगवान् को दोष देना शुरू कर देते हैं। भगवान ने सभी को बराबर चीजें दीं हैं बस जरूरत है तो हमें अपनी मानसिकता बदल कर जीवन को अच्छे ढंग से जीते हुए नयी ऊँचाइयों पर पहुँचाना। आइये पढ़ते हैं ऐसी ही सोच को दर्शाती यह कहानी :- ‘ दो गुब्बारे ‘

दो गुब्बारे

दो गुब्बारे

 

शहर के बाहर एक कोने में जो खेल का मैदान था। वहां आज मेला लगा हुआ था। बहुत चहल-पहल थी। राहुल भी अपने पापा के साथ मेला देखने गया था। मेले में उसने झूला-झूला, गोल-गप्पे खाए और बहुत मजा किया। आते समय उसने दो गुब्बारे खरीदे।

उसके लिए ये कोई साधारण गुब्बारे न थे। उसने तो इन गुब्बारों का नामकरण भी कर दिया था। एक का नाम उड़ने वाला गुब्बारा और दूसरे का गिरने वाला गुब्बारा। घर आते समय कार में बैठा वो टकटकी लगाये यही देख रहा था कि एक गुब्बारा तो कार की छत से चिपका हुआ था और दूसरा सीट पर था।

उड़ने वाला गुब्बारा तो सुरक्षित था क्योंकि वो ऊपर था लेकिन उसे नीचे वाले पर ध्यान देना पड़ रहा था कहीं कोई उस पर बैठ न जाए। उसके माता-पिता आपस में कुछ बात कर रहे थे जिसके कारन उन्होंने ने राहुल पर ध्यान न दिया।

सब घर पहुचं गए। कुछ देर बाद जब राहुल के पापा सोफे पर बैठ कर कुछ पढ़ रहे थे की अचानक राहुल बोला,

“पापा, मुझे एक बात समझ में नहीं आई।”

“क्या बेटा?”

“ये एक गुब्बारा ऊपर क्यों जा रहा है और दूसरा वाला नीचे क्यों जा रहा है? इसको मई मरता हूँ या फिर उठा कर ऊपर फैंकता हूँ तो थोड़ा सा उड़ता है और फिर आकर नीचे गिर जाता है। और अगर इसे बार-बार उछलता रहूँ तो उड़ता रहता है। ऐसा क्यों?”

“बेटा, ये ओ तुम्हारा गुब्बारा उड़ रहा है इसमें हीलियम गैस भरी हुयी है। ओ इसको ऊपर की ओर उड़ा रही है।”

“और ये दूसरा वाला?”

“इसमें वो हवा भरी है जो बड़ी आसानी से फूंक मारने पर भी मिल जाती है और गुब्बारे के अन्दर-बाहर दोनों है। इसलिए ये नीचे गिर रहा है। इसे जब तक अपनी ताकत से उड़ाओगे तब तक उड़ेगा बाद में नीचे गिर जाएगा। दूसरी हीलियम गैस थोड़ी मेहनत करने से प्राप्त होती है। उसे बनाना पड़ता है। इस गुब्बारे के बाहर साधारण हवा है लेकिन इसके अन्दर स्पेशल गैस है इसलिए वो गुब्बारा उपार जा रहा है।”

“समझ गया मैं पापा।”

प्रसन्नचित मुद्रा में राहुल बोला जैसे कोई बड़ा खजाना हाथ लग गया हो।

“क्या समझे?”

“अगर ऊपर जाना है तो अन्दर कुछ स्पेशल होना चाहिए नहीं तो सबकी तरह नीचे ही रह जाओगे।”

“बिलकुल सही, इसलिए चलो अब थोड़ा पढ़ लो। तभी तो स्पेशल बनोगे ना।”

राहुल ने दोनों गुब्बारों को देखा और हीलियम गैस से भरे गुब्बारे को ले गया और साधारण हवा से भरे गुब्बारे को वहीं छोड़ गया। क्योंकि वो गुब्बारा उसके लिए साधारण था।

दोस्तों हमारा शरीर भी खाली गुब्बारे की तरह है। हम कितनी दूर जाएँगे ये इस बात पर निर्भर करता है की हमारे अन्दर आगे बढ़ने की कितनी चाहत है। हम कितना प्रेरित हैं। हमारे अन्दर भी दो तरह की हवा भरी जा सकती है। एक है अपने लक्ष्य के लिए आगे बढ़ने की और दूसरी साधारण जीवन जीने की।

हालत हमारी भी उन्हीं गुब्बारों की तरह ही होती है। यदि हमारे अन्दर कोई ख़ास गुण होगा तभी हम जिंदगी की ऊँचाइयों पर पहुँच सकते हैं। नहीं तो एक जानवर की तरह अपनी जिंदगी बीतेंगे और एक दिन इस दुनिया को अलविदा कह देंगे।

“समस्या ये नहीं की लोग हमसे क्या चाहते हैं। समस्या ये है की हम खुद से क्या चाहते हैं? जिस दिन हमें इस सवाल का जवाब मिल गया उस दिन हम खुद-ब-खुद ऊपर की ओर उड़ना शुरू कर देंगे।”

अपनी जिंदगी को बदलने के लिए हमें अपने अन्दर बदलाव लाना होगा। बाहरी बदलाव अस्थायी होते हैं स्थायी नहीं। अगर आप बाहरी दबाव में अच्छा काम करते हैं तो सदा दिन ऐसा नहीं चलता। जैसे उस बच्चे ने वो हवा वाला गुब्बारा फैंक दिया था उसी तरह ये दुनिया भी आपको ज्यादा दिन नहीं झेलेगी।

वहीं अगर बात करें अन्दर से प्रेरित होकर काम करने की तो ऐसे इन्सान को कोई भी आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। क्योंकि ऐसे लोग हर हालत में एक सा काम करते हैं और वो हमेशा अच्छी क्वालिटी का होता है। जिसके बल पर वो जिंदगी में हर ऊँचाई को हासिल करने की ताकत रखते हैं।

अब जरूरत है तो अपने अन्दर वो सब चीजें भरने की जो आपको आगे बढ़ने में सहायता करें। खुद को प्रेरित करें, सोच को सकारात्मक बनायें, एकाग्रता बनायें और धैर्य रखें। सफलता एक दिन आपके कदम अवश्य चूमेगी।

आपको यह कहानी ‘ दो गुब्बारे ‘ कैसी लगी इस बारे में अपने विचार हमें जरूर लिख भेजें। हमें आपकी प्रतिक्रियाओं का इन्तजार रहेगा। धनयवाद।

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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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