दिवाली पर कविता :- आयी रोशन दिवाली है | दीपवाली पर कविता

दिवाली की महत्वता भारत में बहुत ज्यादा है। छोटे बच्चे से लेकर बड़े-बुजुर्ग सब इस त्यौहार का आनंद उठाते हैं। वैसे तो दिवाली कयी कारणों से मनाई जाती है। परन्तु जो कारण जग जाहिर है वो है राम जी की अयोध्या वापसी। आज के ज़माने में पटाखों और शोर शराबे के बीच दिवाली की ख़ुशी कुछ अलग ही तरह की होती है। इसी ख़ुशी में आपको सराबोर करने के लिए हम लाये हैं दिवाली पर कविता  :-

दिवाली पर कविता

दिवाली पर कविता

धरती पर उतरे हैं तारे आज रात ये बहुत निराली है
जगमग-जगमग चमक रही आयी रौशन दिवाली है।

खुशियाँ चारों और हैं फैली सबके मन में इक चाहत है
हो जाए सारी साफ सफाई तब जाकर कहीं राहत है,
रंग रंगाई भी कर दी घर की बस रंगोली सजने वाली है
जगमग-जगमग चमक रही आयी रौशन दिवाली है।

बाजारों में भीड़ लगी है धड़ाधड़ बिक रही है मिठाई
बर्फी ही लेनी है कहकर बच्चे कर रहे हैं ढिठाई,
लेकर पटाखे आवाजों वाले चाल ये चले मतवाली हैं
जगमग-जगमग चमक रही आयी रौशन दिवाली है।

पूजा है का अब समय हुआ अँधियारा होने वाला है
भगवान् की मूर्तियों पर हमने पहले ही चढ़ा दी माला है,
खोल दो सारे दरवाजे कि माँ लक्ष्मी जी आने वाली हैं
जगमग-जगमग चमक रही आयी रौशन दिवाली है।

दशहरे वाले दिन राम जी ने रावण का नाश किया था
कार्तिक अमावस्या के दिन उन्होंने पूरा वनवास किया था,
इसी ख़ुशी में रात अँधेरी तब से बन गयी दीपोंवाली है
जगमग-जगमग चमक रही आयी रौशन दिवाली है।

पटाखे भी जलाएंगे हम और राकेट को भी उड़ायेंगे
परिवार के साथ में बैठके ढेर सारी मिठाई खायेंगे,
खुशियों में सब झूम रहे हैं चाल हुयी सबकी मतवाली है
जगमग-जगमग चमक रही आयी रौशन दिवाली है।

झूठ न बोले, न पाप करें हम इस दिवाली सौगंध ये खाएं
पढ़े-लिखें, सबको पढ़ायें ज्ञान का प्रकाश हम फैलाएं,
जुए और शराब का विरोध करें जो कि समाज पर गाली है
जगमग-जगमग चमक रही आयी रौशन दिवाली है।

मन से मिटा दे बैर हम बस प्यार का पाठ जग को पढ़ायें
भारत का नाम रोशन कर के सारे जहाँ में हम चमकाएं,
दिखा दें हम सबको कि अपनी हर इक अदा निराली है
जगमग-जगमग चमक रही आयी रौशन दिवाली है।

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Sandeep Kumar Singh

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