कविताएँ भावनाओं की :- अलग-अलग भावनाओं पर छोटी कविताओं का संग्रह

अभी तक आपने मेरी कई कविताएँ पढ़ी होंगी। वो कविताएँ किसी न किसी विषय को लेकर लिखी गयी हैं। जिसमे उन्हें विस्तार से बताया गया है। लेकिन कुछ भावनाएं ऐसी होती हैं जिनके लिए बहुत ही कम लफ़्ज़ों की जरूरत पड़ती है। ऐसी ही भावनाओं को शब्दों के रूप में लेकर मैंने छोटी कविताओं का कविता संग्रह लिखा है। आइये पढ़ते हैं ‘ कविताएँ भावनाओं की ‘ :-

कविताएँ भावनाओं की

कविताएँ भावनाओं की

फरिश्ता

उसके घर के खाने का जायका
बेशक लजीज न था,
लेकिन वो किसी बीमारी का
अब तक मरीज न था,
संस्कारों का पाठ पढ़ाया था जिसने
अपने गरीब परिवार को
वो शख्स किसी को अजीज न था,
लहजे में मिठास और
अदब में उसकी लियाकत थी,
कमीज जरूर फटी थी उसकी
लेकिन वो बद्तमीज न था।

पढ़िए कविता  :- बंजर है सपनों की धरती


हवाओं का रुख

हवाओं का रुख मेरे खिलाफ है तो क्या
हम तो साथ में तूफान लिए चलते हैं,

मौत का डर हमें क्या देगा कोई
हम तो हथेली पर जान लिए चलते हैं,

आज तक पैदा न हुआ कोई जो आगे बढ़ने से रोक सके हमें,
हम मंजिलों को पाने का अरमान लिए चलते हैं,

जहां जाते हैं झुक जाते हैं सिर लोगों के
बादशाहों जैसी हम शान लिए चलते हैं,

हवाओं का रुख मेरे खिलाफ है तो क्या
हम तो साथ में तूफान लिए चलते हैं।


जिंदगी की राहों में

न जाने कैसी है जिंदगी जो इसमें इतने गम हैं
रिश्तों के तानों बानों में उलझे हुए से हम हैं,

हर शख्स ने उठाया है फायदा इस कदर मेरा,
हालातों के आगे पड़े हुए बेदम हैं,

मिल जाये जिससे मंजिल उस रहगुजर की तलाश है,
कब से भटक रहे हैं ना जाने कैसे कर्म हैं,

दर्द सुनाया तो बन गए मजाक सभी के लिए
न जाने दुनिया वाले कितने बेरहम हैं,

बस लिख रहा हूँ मैं जो सितम वक़्त ने किया
कोई इसे गीत कहे कोई कहता नज्म है,

न जाने कैसी है जिंदगी जो इसमें इतने गम हैं
रिश्तों के तानों बानों में उलझे हुए से हम हैं।


मतलबी दुनिया के मतलबी लोग

वो हमें याद करें न करें
लेकिन हमसे उन्हें,
न याद करने की शिकायत
जरूर करते हैं,
वो तो अकड़ में
भरे रहते हैं हमेशा,
अगर हम बात न करें
तो वो भी कहाँ करते हैं,
गलतियां निकलना तो
जैसे फितरत है उनकी,
कुछ सुना दो तो बातें
चिकनी चुपड़ी करते हैं।


क्या-क्या बताऊँ तुम्हें

क्या-क्या बताऊँ तुम्हें कि तुम्हारी खातिर
इस दिल में जज़्बात बहुत हैं,

उतारने लगता हूँ जो कभी कागजों पर
तो उलझ जाते हैं आपस में लफ्ज़ लिखे,
कि मन में तुझसे जुड़े खयालात बहुत हैं,

धड़कने बढ़ जाती है जिस वक्त
तेरी वजह से कैसे बयां करूं,
मेरी जिंदगी में ऐसे हालात बहुत हैं,

खुदा ने मेरी दुवाओं के बावजूद
तुझे देने से इनकार कर दिया,
तुझसे हो जाए एक मुलाकात बहुत है,

हाँ ये जानते हैं कि इस जन्म में
तुझे पाने की ख्वाहिश भी बेमानी है,
मेरी वजह से हो तेरे होठों पे मुस्कुराहट बहुत है,

इसी तरह खुशनुमा और शानदार रहे
तुम्हारी ये प्यारी जिंदगी,
बस इसी बात से मिलती है मुझे राहत बहुत है,

क्या-क्या बताऊँ तुम्हें कि तुम्हारी खातिर
इस दिल में जज़्बात बहुत हैं।

पढ़िए कविता  :- दिल ने फिर याद किया

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धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

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