आरक्षण की समस्या – लेखक के साथ एक घटना।

नमस्कार मित्रों, मेरे साथ हुआ ये घटना मै आप लोगो के साथ बाँट रहा हूँ। जब मै एक ऐसे आदमी से मिला था जो आरक्षण की समस्या के कारण अपने अस्तित्व के लिए अपने जीवन में संघर्ष कर रहा था।

आरक्षण की समस्या

आरक्षण की समस्या

आज मेरी अंग्रेजी की पहली परीक्षा थी। मैं जैसे ही परीक्षा देने पहुंचा वहां पर मेरी मुलाकात एक ऐसे इंसान से हुई जो देखने में तकरीबन 30 साल के आसपास लग रहा था। मैंने उसे जैसे ही उसके बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया कि वह दोबारा परास्नातक की परीक्षा देने के लिए वहां पहुंचा है। फिर पूछने पर पता चला कि वह किसी अच्छे विद्यालय  में अध्यापक लगने की चाह से वह अपने अंक बढ़ाने के लिए दोबारा परीक्षा देने आया था।

उसने बताया कि उसने अपनी शिक्षा आठवीं कक्षा के बाद ही छोड़ दी थी। आठवीं कक्षा के बाद उसने एक विद्यालय में सफाई कर्मचारी का काम करना शुरू किया। कुछ ही दिन बाद विद्यालय में एक प्राध्यापक का स्थानांतरण हुआ। नए प्राध्यापक ने उसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और मैट्रीकुलेशन की परीक्षा दिलवाई। वह परीक्षा में पास हो गया। उसके बाद वह वहां पर रहता हुआ कार्य करता रहा।

कुछ वर्षों पश्चात एक नए प्राध्यापक के आने के बाद उस प्राध्यापक ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दिलवाई। परीक्षा देने के बाद वह लड़का बारहवीं पास हो गया लेकिन उसके सामने अभी भी समस्या थी कि वह आगे क्या करेगा ? उसने कुछ पैसे जमा कर स्नातक की परीक्षा दी।

उसके बाद सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए उसने कई  प्रयास किए। वह हर परीक्षा में अच्छे अंक  प्राप्त करता। परंतु उसके सामने सबसे बड़ी चिंता का विषय यह था, कि वह टेस्ट में उत्तीर्ण होने के बाद, अच्छे अंक आने के बावजूद उसकी नौकरी  आरक्षित वर्ग का कोई व्यक्ति ले जाता है। इस तरह उसे अपने जीवन में आरक्षण की समस्या के कारण काफी संघर्ष करना पड़ा रहा है। और एक बहुत ही दयनीय हालत में रहकर उसे अपनी जिंदगी का सफ़र पूरा करना पड़ रहा है।

क्या इस तरह अपने देश को हम आगे बढ़ा सकते हैं? कि जहां पर एक एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति, जिसके पास हर एक गुण और काबिलियत  है और वह काबिलियत होने के बावजूद अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। और उसके भविष्य के लिए उसे कोई ही रास्ता नजर नहीं आता।

यह वह देश है जहां किसी व्यक्ति के अच्छे कर्मों और काबिलियत  की वजह से नौकरी नहीं दी जाती अपितु उसकी जाति देख कर नौकरी दी जाती है। चाहे वो उस के काबिल भले ही  न हो। यहां पर एक व्यक्ति को उसकी काबिलियत के अनुसार उसका हक मिले ना की उसकी जाति या फिर किसी और कारण से। हर व्यक्ति अपने कर्म के अनुसार जाना जाए। तभी इस  देश के भविष्य में को भी सुधर आ सकता हैं और हमें भारतीय होने पर गर्व होगा  न कि किसी जाति से संबंधित होने पर।

ये रचनाएँ भी पढ़े..



अच्छा लगा? तो क्यों ना शेयर और लाइक करे..!


Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

शायद आपको ये भी पसंद आये...

अपने विचार दीजिए:

Your email address will not be published. Required fields are marked *