कहानी दो गधों की | सीख देती लघु कहानी | बच्चो के लिए कहानी

आज मैं एक सज्जन के साथ एक सभा में गया था। वहां सब अपने-अपने विचार रख रहे थे। तभी एक सज्जन मंच पर आये फिर उन्होंने जो बोलना शुरू किया। वह सुन कर मन को उस बात में ऐसी सच्चाई नजर आई लेकिन कहते हैं ना कि कि सबका अपना नजरिया होता है । तो मैंने अपने नजरिये से उसमे एक सकारात्मकता देखी और मेरा दिल हुआ मैं ये बात आप सब के साथ साझा करूँ। ये है कहानी दो गधों की ।

कहानी दो गधों की

कहानी दो गधों की

ये है कहानी दो गधों की । दोनों कि आपस में जरा भी नहीं बनती थी। दोनों एक दूसरे के खिलाफ ही काम करते थे। एक बार किसी ने दोनों को एक रस्सी से बाँध दिया। दोनों ने रस्सी खोलने की पूरी कोशिश की। काफी देर बाद जब वे रस्सी नहीं खोल पाए तो ठक कर बैठ गए। एक साथ बैठे-बैठे कुछ देर बाद दोनों को भूख लगी। लेकिन आस-पास खाने के लिए कुछ नहीं था। दोनों खाने कि तलाश में निकले।

वो खाने की तलाश में क्या निकले एक दुसरे से विपरीत दिशा में जाने लगे लेकिन रस्सी के कारण न जा सके। किस्म,अत से जल्दी ही वो एक ऐसी जगह पर पहुंचे जहाँ दोनों के सामने फूल लगे हुए दो गमले थे लेकिन वो दोनों गमले इतनी दूरी पर थे कि जब भी दोनों उन फूलों को खाने के लिए आगे बढ़ते तो रस्सी का तनाव बढ़ जाता। इस कारण उनके गले दब जाते लेकिन वो फूलों तक न पहुँचते। उनके गले दबने के कारण उनकी मृत्यु भी हो सकती थी। भूख दोनों को लगी थी और दोनों चाहते थे की जितनी जल्दी हो सके वो अपना पेट भर लें।

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अब दोनों सोचने लगे कि किया क्या जाए। दोनों अपनी अपनी जिद पर अड़े थे कि दोनों एक दूसरे से पहले खाएँगे। वक़्त बीतता जा रहा था लेकिन दोनों झुकने का नाम नहीं ले रहे थे। भूख ऐसी चीज है जिसे कोई भी ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकता। अब दोनों की ताकत ख़तम होती जा रही थी। जब भूख दोनों की बर्दाश्त से बाहर हो गयी फिर दोनों ने एक सलाह बनायीं।

उस सलाह के अनुसार दोनों उन फूलों को खाने के लिए बढे। दोनों एक साथ एक ही गमले की तरफ बढे। दोनों ने पहले एक गमले का फूल खाया फिर दूसरे गमले कि तरफ बढे और उसके फूल खा कर अपनी भूख मिटाई। उसके बाद वे समझ गए कि विपरीत परिस्थितयों में हमें अपना धैर्य नही खोना चाहिए।

जिंदगी में ऐसे कई पड़ाव आते हैं जब अपने अहंकार के कारण हम अपनी ही हानि करवाने लगते हैं। ऐसे समय में हमे सहता से काम करना चाहिए और जित्मा हो सकर आस-पास के लोगों से मेल भाव बढ़ाना चाहिए। अगर गधे जानवर होकर अपनी समझ का प्रयोग कर सकते हैं तो हम इन्सान होकर एक साथ रह्कर क्या नहीं कर सकते। हमे कभी भी हिमात नहीं हारनी चाहिए। कहा भी गया है :- एकता में बल है। लेकिन ये बल शारीरिक की जगह मानसिक हो तो उसका असर कई गुना ज्यादा हो।

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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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